Vijay Kumar
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साहित्य
मंजिल
जीवन में एक लक्ष्य होना चाहिएइस केलिए नए ख्याल सोचना चाहिएइस विचार को आगे बढ़ना चाहिएऔर सार्थक करने का यत्न…
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साहित्य
गजल।।
कहे किसको जाकर,,,,ये दिल के अरमांअब हम तुम्हारे काबिल नहीं है,, फिजाओं से कह दो,,तुम अब ये जाकर,,2वक्त अभी ये,…
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साहित्य
प्राकृतिक संसाधन और हम
आलेखः प्रस्तावना: हवा, पानी, जंगल, खनिज, मिट्टी—ये सब प्रकृति के उपहार हैं। पर पिछले 100 साल में इंसान ने इन्हें…
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साहित्य
अनसुनी, अनदेखी आवाज़
तुम्हारी याद के साये में, सिमट कर रह गई हूँ मैं,कि जैसे अनसुनी-अनदेखी, आवाज़ बन गई हूँ मैं। वो तीन…
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साहित्य
आंखों में समन्दर
आंखों का समंदर कैसा अजीब समंदर हैयह ऐसा समंदर जिस नाप न सके कोई, ना इनका ओर न छोरहर बूंद…
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साहित्य
सितम मौसम के
सितम मौसम के भी अजीब होते हैंमौसम के बदलते मिजाज क्या खूब होते हैंकभी हंसाते हैं ,तो कभी रुलाते हैंसावन…
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साहित्य
विश्व पृथ्वी दिवस
ये धरती मां जैसी दुलारी प्यारीहरी -भरी धरती विरासत है हमारीआंचल में इसके नदियां है बहतीगोद में हैं संरक्षित जंगल…
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साहित्य
बुजुर्गों का सम्मान
बुजुर्ग सनातन की धड़कन, सभ्यता की मूल मिजाज हैं,इनका सम्मान करना ही, धर्म की असली रीत-रिवाज़ हैं| कितने अरमान गले…
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साहित्य
हनुमान के राम
जय श्री राम राम को समझू , राम को गाउँ।राम बिना मैं, रह ना पाऊँ।कौन भला इस जग में ऐसा,आओ…
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साहित्य
नृत्य:भावों की जीवंत भाषा
कला के रंगों में रंगी,सुंदर भावों में ढली।हर मुद्रा में एक भाषा,नृत्य में जीवंत कहानी है। घुंघरू की छम छम…
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