Vijay Kumar
-
साहित्य
शीर्षक: मैं हूँ पक्षी मित्र
कविता मौलिक रचनामैं हूँ पक्षी मित्र—दाना, पानी, प्यार,नन्हें पंखों में बसता मेरा संसार। न काटो वन, न छीनो उनका घर,चहकेंगे…
Read More » -
साहित्य
पूर्णिका
हो जाए जो हो जाने दो।जश्न जीवन को मनाने दो।। कब मिलते हैं ऐसे मौके।अब चाह को आजमाने दो।। बहुत…
Read More » -
साहित्य
लेख- तकनीक ने छीनी पहचान।
आज का मनुष्य तकनीक का गुलाम हो गया है। तकनीक ने सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचाया है। हम हर…
Read More » -
साहित्य
जनगणना
घर-घर दस्तक देती टोली | घर-घर दस्तक देती टोली |लेकर प्रश्नों की इक झोली ||नाम पता और उम्र पूछती |वह…
Read More » -
साहित्य
कैसा जमाना आया है ?
कैसा जमाना आया है ?सही, झूठ देख घबराया है,सारे जहाँ के बुरे कृत्य कर,पापी शान से मुस्काया है..कैसा जमाना आया…
Read More » -
साहित्य
विश्व मजदूर दिवस
महात्मा गांधी का कहना किसीदेश का विकास वहाँ के कामगारोंऔर किसानों पर निर्भर करता है,उनके बिना विकास संभव नहीं है।…
Read More » -
साहित्य
सफलता
काफी मुश्किल काम हैसफलता को शब्दों में बाँध पानासफल होने के लिए है जरूरीबिना रुके निरंतर चलते जाना । जो…
Read More » -
साहित्य
सीता जी का अवतरण दिवस
जनक सुता जग जननि जानकी।अतिशय प्रिय करुणा निधान की।।तेहि के युग पद कमल मनावऊ।जासु कृपा निर्मल मति पावऊ।। इन्हीं भावों…
Read More » -
साहित्य
विनयान्जली।
जीवन केअपरान्ह काल मेआज,,क्षमा भाव मेकहता हूं । चाहे हुई हो,कोई भूल चूक,जाने अनजाने में,,स्वीकार उसे में करता हूं।1 करता…
Read More » -
साहित्य
भक्ति की शक्ति – दोहा
ईश भक्ति की शक्ति है , आत्म शांति की बात। नाम सदा जपते रहें , दिन हो चाहे रात।। राम…
Read More »








