Vijay Kumar
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साहित्य
मानों वो कह रहे हों
विषय- जब वृक्षों ने कहा मुझसेविधा- कविता जब मैं राहों से गुजरती हूँ तो,इन वृक्षों को देखती हूँ।जब मैं राहों…
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साहित्य
स्त्री होना ही एक उच्च पदवी है
स्त्री का मन अथाह सागर की तरह है , जिसमें भावभीनी लहरें उछलती कूदती रहती हैं । ये लहरें खुबसूरत…
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साहित्य
पहचान
अपनी धरती अपने लोग देश का कैसे उत्थान।श्रमबल सद् नियत ,सिर उठा खड़े हुए वो शान।परमाणु युद्ध में मिटा सिरमौर…
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साहित्य
मई दिवस पर विशेष
(श्रम शक्ति) एक मई का दिन है, मजदूरों के नाम lजो आए इस देश की प्रगति के सदा काम ll**हज़ारों…
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साहित्य
सरदार हरि सिंह नलवा जी की जयंती पर सजा कल्प कथा मंजूषा मंच
बेगूसराय बिहार की कथाकार श्रीमती आरती झा आद्या कल्प मंजूषा प्रशस्ति पत्रम से सम्मानित प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज…
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साहित्य
गीत
प्रिय, मेरे इधर भी आ जाना।नजरों से नजर मिला जाना।।दुनियां की बातें छोड़ तुम,बस मुझको दरस दिखा जाना।।प्रिय मेरे इधर…
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साहित्य
पत्थर के शहर में रजनी
पत्थर की इस दुनिया में, आईना-ए-दिल कहाँ धरूँ?मुखालिफ हैं हवाएँ सब, उड़ान अपनी कहाँ भरूँ?चीर कर इन पंखों को, ये…
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साहित्य
गर्मी मौसम से सावधान होना
गर्मी मौसम में ज्यादा धूप होता हैइससे हवाएं तेजी से फैल रहीं हैहमें सावधान से होना जरूरी हैनहीं तो बुखार…
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साहित्य
अस्तित्व पर जब प्रहार हो
अस्तित्व पर जब प्रहार हो,साथ आँसुओं की धार हो,तब आवाज़ उठाना अधिकार है,फिर इस पर ना कोई विचार हो। दिखावे…
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साहित्य
हम दो, हमारे दो ही तमाम हैं
कितने सुंदर दिन बचपन के,सब को फुर्सत ही फुर्सत थी,अब फुर्सत तो ग़ायब हो गयी,अब सबके पास बहुत काम हैं।…
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