Vijay Kumar
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साहित्य
अब मैं उम्र के उस मोड़ पर हूँ…
विषय- उम्रविधा- कविता अब मैं उम्र के उस मोड़ पर हूँ कि फिर से एक बच्ची बन जाना चाहती हूँ।…
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साहित्य
चरित्र पर उंगली
अच्छा सिला दिया मेरी वफाओं काक्या रंग दिखाया इतने सालों की मेहनत काकर दिया बदनाम मेरी तपस्या कोपर तुझे देर…
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साहित्य
इच्छा शक्ति
मानव उन्नत शिखर को पानाजीवन में सफलता को पानायश और प्रतिष्ठा को पानागौरव और सम्मान को पानाये सभी इच्छा शक्ति…
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साहित्य
जनकनंदिनी की महिमा से गुंजायमान २४६वीं कल्पकथा काव्यगोष्ठी; श्रद्धा, सरसता और साहित्य का अनुपम संगम
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु…
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साहित्य
गीत
प्रिय, मेरे इधर भी आ जाना।नजरों से नजर मिला जाना।।दुनियां की बातें छोड़ तुम,बस मुझको दरस दिखा जाना।।प्रिय मेरे इधर…
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साहित्य
आलोचनाओं से सुधार होता है
किसी को माफ़ किया जाता है,पर विश्वास नहीं किया जाता है,उसे और उसका व्योहार भूलकर,जीवन में आगे बढ़ जाया जाता…
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साहित्य
माँ का बुढ़ापा मेरी बिमारी
बड़ी ही कठिन है माँ ये दुनियाँ तुम्हारी हमारी हैतेरा बुढ़ापा और मुझे मिली ये असाध्य बिमारी हैतेरा मेरा दर्द…
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साहित्य
दो,टुक।।
तुम्हारा मुस्कुराना हीहमें अच्छा लगता है,2तुम्हारा खिलखिला ना हीहमें अच्छा लगता है,,,2 मुस्कुराने में ही,,,सभी की तंदुरुस्ती है,,मगर यूं चुपचाप…
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साहित्य
रूको जरा कुछ पल माँ तुम
विषय- माँविधा- कविता रूको जरा कुछ पल माँ तुम,मैं बचपन को याद करती हूँ।माँ मैं तेरा दर्द समझती हूँ,हाँ मैं…
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साहित्य
आज के आधुनिक समय में
आज के आधुनिक समय में ऑनलाइन सुविधाएँ हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। चाहे खाना हो, दवा हो या…
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