Vijay Kumar
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साहित्य
क्यूं बड़े हो गए हम
कहां थे कहां से कहां आ गए हमजल्द ही बच्चे से क्यूं बड़े हो गए हम मस्ती से भरा था…
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साहित्य
खामोशियां सब कह जाएं
यह बेजुबान ख़ामोशियां,कभी ख़ामोश नहीं होती हैं।कभी-कभी इन खामोशियों मेंदिल की आवाज छुपी होती है।ये खामोशियां,आंखों में उमड़ते भाव,टपकते आंसुओं…
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साहित्य
मैं जब भी लिखूँगी
मैं जब भी लिखूँगी,बेशुमार लिखूँगी,छिप कर रह गई जो,हर बात लिखूँगी। तुम समझ रहे हो तिनका,मैं कायनात लिखूँगी,कोई खोल दे…
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साहित्य
हृदय में प्रकाश
प्रारम्भी नेह:-तन पर चंदन ,हृदय में प्रकाश है।।साधना ही जीवन का आभास है।। शब्द नहीं, मौन में बोले जो राम।उसकी…
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साहित्य
चतुर्थ तथागत बुद्ध सद्भावना मेले के अंतिम दिन कवि सम्मेलन के माध्यम कवियों ने की देश प्रेम और सद्भावना की अपील
मिलन केंद्र बिरारी भरथना इटावा में बाबा साहब डॉ.भीम राव अम्बेडकर सद्भावना मेला का आयोजन 22 से 27 अप्रैल 2026…
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साहित्य
गीत सृजन
मुखड़ा-पहाड़ों से फिर आवाज़ आई है,सूरज ने फिर से आग लगाई है।। मैं हूँ वही अटल, अडिग सा पर्वत,जिसने हर…
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साहित्य
बुजुर्गों का सम्मान
मेरे दादा जी की लाठी बोले,जीवन अकेला चलता नहीं।और दादी के पल्लू का सिक्का बोले,बिन पैसे के कुछ मिलता नहीं।…
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साहित्य
धरती मां के अमर सपूत
धरती मां के आंख के तारे,भारत के है राजदुलारे,वे राजदुलारे थे,जो स्वतंत्रता के दीप जलाते थे,धरती मां के चरणों में,सदा…
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साहित्य
मोह
मोह मन का सूक्ष्म जाल है,मोह ही जीवन का बवाल है।मोह सच्चाई से दूर करता है,मोह ही दु:ख का कारण…
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साहित्य
धुंध में घिरा सवेरा
युद्ध की लपटों में घिरा देश का आने वाला कल,मजहबी धुंध ने भी कर दिया है आसमान धुंधल।जहाँ उम्मीदों के…
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