Vijay Kumar
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साहित्य
दो का खेल — एकत्व की चेतावनी
सुख-दुःख का खेल, समझो यह धोखा है,जीवन-मृत्यु का चक्र, रोके नहीं रुकता है।राग-द्वेष में फँसे जब, मन रोता रहता है,अहं…
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साहित्य
मौसम तो हर साल बदलता है,
मौसम तो हर साल बदलता है,पर कुछ मौसम मन में ठहर जाते हैं,कुछ बारिश बनकर आँखों से बहते हैं,कुछ धूप…
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साहित्य
दहल गया दिल देख कर,दिल्ली की तस्वीर
दहल गया दिल देख कर,दिल्ली की तस्वीर |वीभत्स अग्नि कांड से,टूटा सबका धीर ||टूटा सबका धीर,संकट बड़ा गहराया |बहे नयन…
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साहित्य
जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण बातें
एक बात बोलूं साहेब,भले शादी करने के लिए दो लोगों की जरुरत पड़ती है, लेकिन प्रेम करने के लिए नहीं…
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साहित्य
मेरे दिल की बात आखिर सुनेगा कौन
सब सो रहे हैं चैन की नींद में यहाँ,मेरे दर्द को सहलाने को जागेगा कौन। लुटता रहा, छटपटाता रहा ज़िंदगी…
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साहित्य
मेरी साईकिल और उसकी लूना
वो दौर भी एक दौर थाइश्क का एक बेगज़ब जोर थाझलक उसकी एक पाने की ही हर वक़त खुमारी थीसाईकिल…
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साहित्य
मुझे नही सोना है
अब ,मुझे नही सोना हैसिर्फ और सिर्फ जागते रहना हैसोने से बहुत डर लगता हैसपने मे खोये लोग आता हैनींद…
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साहित्य
जेठ की गर्मी: दुपहरी का लू
आया जेठ का महीना,आग बरसाता सूरज,धरती तवे-सी तप रही,साँसें भी हैं अब बोझ।दुपहरी होते गलियाँसब सन्नाटे में डूबें,छाया भी माँगे…
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साहित्य
खामोश दिल की आवाज
खामोश हूँ तो इसका मतलब ये नहीं,की मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं।कुछ जख्म ऐसे भी होते हैँ,जो शब्दो…
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साहित्य
गुरु जौहरी प्रभु अपना हीरा
विधा:कविता प्रभु अपना हीरा गुरू जौहरी ने खोज दिया।प्रभु अपना चंदन गुरू ने जल में घोल दिया। गुरू की कृपा…
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