Vijay Kumar
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साहित्य
बहुत बिखरी बहुत टूटी
विषय- माँविधा- कविता बहुत बिखरी बहुत टूटी,न अपनों से कभी रूठी। नाज़ुक दिल था सुकोमल थी,कभी काया भी ये मेरी।…
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साहित्य
ग़ज़ल
अना देखी नहीं जाती।फ़ना रोकी नहीं जाती। बयाँ भी कर नहीं सकते,ज़ुबाँ भी सी नहीं जाती। करें हम लाख कोशिश…
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साहित्य
माना कि देश चलाते हों
विषय- कर्मो का हिसाबविधा- कविताशीर्षक- माना कि देश चलाते हो माना कि देश चलाते हो,तुम करो जरा वफादारी।जब खाता खुलता…
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साहित्य
जीवन पथ
मानव जीवन अति मूल्यवान होतासुख और दुखों से नित लड़ाताश्रम और साधना से कार्य करताजीवन पथ में सही मार्ग को…
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साहित्य
माटी का खिलौना
माटी का खिलौनामाटी में मिल जाएगा।2क्यों करता है गुरूर,रे पगले,,,तू यूं ही मर जाएगा ।।2 तूने बनाए गाड़ी बंगलेसैर सपाटे,,,सब…
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साहित्य
नारी जीवन
जय घोष गीत।। जय घोष हो तुम,नारी जाति का,,।होशं ख नाद तुम,उस अबला का।। हो वीरांगना तुम,उस नारी जाति की,,हो…
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साहित्य
है “पाक” की मंशा पाक नहीं
है “पाक” की मंशा पाक नहींनीयत भी उसकी साफ नहींकश्मीर पर उसकी गिद्ध दृष्टिकर सकते उसको माफ नहीं। कश्मीर की…
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साहित्य
असम्भव को सम्भव बनाते हैं
प्रकृति के आगे है बेवश हर इंसान,हैं इक समान सब उसकी पैनी नजर में,वहाँ नहीं चलता बाइबल, वेद और कुरान,उलझे…
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साहित्य
घर में ही सुरक्षित रहना पड़ेगा
भीषण आग बरस रही है,चिलचिलाती तेज धूप है,बेवजह बाहर जाना नहीं,आँखे चुँधियाना ठीक नहीं। धधकती लू है, गर्म हवा है,अल…
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साहित्य
नर्क-कीट न कोई मीत
किस सुख की करे कल्पना,जीवन होवे पूरा।तृष्णा नित्य बढ़े मृग सम रहे सपन अधूरा।इच्छाओं के संग बजे ये मन, ज्यूं…
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