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तीसरा नाम और मिहार की पहली चीख
काले काग़ज़ ने मिहार की हवा और भारी कर दी थी।जुना की परछाईं टूट चुकी थी,लेकिन उसकी गूँज अब भी…
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कर्तव्य
कर्तव्य वह अग्नि है, जो भीतर चुपचाप जलती है,स्वार्थ की ठंडी छाया को साहस से पिघलाती है।यह बोझ नहीं, इस…
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अकेलेपन का सफ़र
मैं अकेला ही चला था अपनी मंज़िल पाने को,रास्ते में कुछ लोग मिल गए हाथ बढ़ाने को। कुछ ने मेरा…
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अधजल गगरी छलकता जाए
“भरी गगरिया चुपके जाएअधजल गगरी छलकत जाए”अधजल गगरी छलकत जाए का अर्थ है की अल्प ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा…
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वो अपना शहर
वो अपना शहर जो कल तक अपना थाक्यों आज वो अपना शहर लगता बेगाना हैजिस शहर गली बीता बचपन जन्म…
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अंतर्मुखी
टूट कर जब गिरा दूरकर गया वह बड़ी भूलसोचा था मिलेगा प्यारमिले धक्के और शूल तड़पकर याद करता रहाढूंढता रहा…
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भगवान श्री हरि नारायण विष्णु के विविध अवतारों को समर्पित रही २३४वीं कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी।
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु…
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सुध बुध बिसराए बैठी
मैं तो सारी उमरिया लुटाए बैठी लुटाए बैठीगिरधारी मैं सुध बुध बिसराए बैठीतेरे हाथों में बंशी, अधरों पे मुस्कानशीश मोर…
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संख्या इक्यावन अति पावन
सनातन अंक ग्यारह- इक्कीस- इक्यावन हैं मन्वंतर।अनादि-अनंत ये संस्कृति उत्तर-दक्षिण व्याप्त कालांतर।आवे शुभता-अभिवृद्धि हो फैले ज्ञान आध्यात्म निरंतर।बहे शुचिता हृदय…
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कोलिया गाँव की पावन धरा।।
२७.४’उ.अक्षांश,७४.५७’पू.देशांतर,अर्दशुष्क थार के पूर्वीद्वार खड़ा है।जिसकी दस हजार की आबादी हैं,५२ हजार बीघा में विस्तार हुआ है।। जिसकी कंचन जैसी…
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