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  • पत्थर

    श्रेणी : आध्यात्मिक(सोलह मात्रा छंद ) पत्थर में भी प्राण बसें, पर हम उसको पहचान न पाए,ठोकर मारें राह चलें,…

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  • ग़ज़ल

    बाहर है हामी-मानी।अंदर से आना-कानी। पहचानी है आँखें पर,नज़रें लगती अंजानी। जीत ज़ुबानी बातों की,जतलाती है हैरानी । भटकायेगी थोड़ा…

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  • बोलती क़लम

    श्रृंगार रस / 16 मात्रा छंद (पद – 1)तेरी याद सजे हर अक्षर मेंमन की कलियों में खुशबू हैक़लम लिखती…

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  • सपेरों का राज

    दुख जाता नहीं, रात कटती नहीं,अंधियारा यहाँ अब छँटता नहीं।उजाले भी अब बिकने लगे,राज सपेरों का मिटता नहीं। साँप गया…

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  • लम्हों में सिमटी जिंदगी

    सुखद प्यारी लम्हों में सिमटी है जिंदगीतुम्हारे संग बिताए तुम लम्हों को कैसे भूल सकती हूंकैसे भूल जाऊं उस प्यारी…

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  • रंग जीवन के

    आओ कुछ हम कहें, कुछ तुम्हारी सुनें,थोड़ा सुकून बाँटें, कुछ दर्द चुनें।थोड़ा रंग भरें इस बेरंग जीवन में,थोड़ी धूप रख…

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  • आओ चलें करने मतदान

    आओ भैया आओ बहना चलो चलें करने मतदानहमारे एक मत से हो जाएगा लोकतंत्र का निर्माणआओ काका आओ काकी चलो…

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  • पुंसवन संस्कार

    जब गर्भ में जीवन की आहट हल्के स्वर में आई,धरती ने ली अंगड़ाई, नभ में हँसी समाई।माँ की आँखों में…

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  • कविता

    सोन नदी में सोना भरा है ,गंगा में समा है गंगटोक ।सरयू में है सार समाहित ,यह कोशी नदी है…

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  • एक पुरानी तस्वीर

    शीर्षक- यादो की तस्वीररचनाकार- नंदकिशोर गौतम ढुंढता हूँ जिस आनंद को,मिलता है वो तुम्हारी तस्वीर मे lना जाने किस जगह…

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