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  • भावपल्लवन

    श्लोक“दीपो भासयते लोकं आत्मदीपः स्वयं भव।”-स्कन्द पुराण, दीपमाहात्म्य (अध्याय ३)अर्थात, बाहरी दीप तो संसार को प्रकाशित करता है, परंतु जो…

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  • मायके के दो पल (मेरा घर)

    चल रहे थे अंतर्मन में द्वंद ,कैसे जा पाऊंगी मां बिन मायका बनके नन्द। हर दीवार ,हर कोना पुकारे ,तेरे…

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  • भाई दूज

    मानव मान है मानवता ,मानव मान या न मान ।मानव मन समझ गए तो ,युग करे तेरा यशगान ।।जीवन मूल…

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  • ख्वाहिशें तेरी-मेरी

    ख्वाहिशें तेरी-मेरी,जैसे नदी के दो किनारे ,मिलना भी ज़रूरी है,और दूरी भी है प्यारे। एक धुन है हवा में,जो हमको…

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  • ईश्वर की सबसे सुंदर रचना

    (गीत – ओम कश्यप) इंसान है रब की सबसे ख़ूबसूरत सोच,हर दिल में बसी है उसकी कोई एक रोशनी की…

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  • सोंधी मिट्टी की खुशबू

    सोंधी मिट्टी की खुशबू,मन को मेरे भाए,ये गाँव की माटी है,जहाँ जीवन मुस्काए। पगडंडी पर धूप-छाँव का,वो बचपन पुराना,खेतों की…

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  • गोवर्धन पूजा

    हुआ था घमंड जब इन्द्र को ,गोकुल को कोप दिखाया था ।छा गए तब चहुॅं ओर बादल ,गोकुल ब्रज जल…

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  • खेत की मिट्टी

    धरती की गोद में, मिट्टी का आलम,जीवन की धड़कन, सृष्टि का संबलम।सूरज की तपन, चाँदनी का आलिंगन,किसान के सपनों का,…

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  • बाप चोर था, बेटा चूहाड़ बन गया

    बाप चोर था, बेटा चूहाड़ बन गया ,सत्ता के लोभ में हूंराड़ बन गया।आज कुतलकड़ा सा बनकर घूमते हैं गाँव-गाँव,भीख…

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  • नरक चतुर्दशी

    दीपावली का उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि यह पाँच दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा है। इस यात्रा के प्रत्येक पड़ाव…

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