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  • पूस की रात

    पूस की रात केअनकहे किस्सेसुनाएं कैसे,नेत्र सजल होते।।होठ कांपते कुछबोल न पाते ।कंठ सूख जाताहाथ कंपकंपातेबेबस लाचारवृद्ध मां,चलने में अक्षम,हाड़…

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  • जब तक परिवार से जुड़ा रहता है

    शब्द व व्यवहार ही मनुष्यकी असली पहचान होते हैं,चेहरा व ऐश्वर्य तो आज हैं,शायद कल नहीं रह पाते हैं। तकलीफ़ें…

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  • मां… तू बहुत याद आती है

    लेखक – ओम कश्यप मां… तू बहुत याद आती है,तेरी बातें अब भी दिल को रुलाती हैं।तेरे बिना ये घर…

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  • समाधि पाद सूत्र– २४

    क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेषः ईश्वर: । क्लेशकर्मविपाकाशयै:= क्लेश, कर्म, विपाक और आशय– इन चारों से; अपरामृष्टः= जो सम्बन्धित नहीं है; {तथा} पुरुषविशेष:=…

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  • समाधि पाद सूत्र–२३

    ईश्वर प्रणिधानाद्वा । वा= इसके सिवा; ईश्वरप्रणिधानात्= ईश्वर प्रणीधन से भी {निर्बीज-समाधि की सिद्धि शीघ्र हो सकती है} । अनुवाद–…

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  • समाधिपाद सूत्र– 22

    मृदुमध्यादिमात्रत्वात्ततोऽपि विशेषः । मृदुमध्याधिमात्रत्वात्= साधन की मात्रा हल्की, मध्य और उच्च होने के कारण; ततः= तीव्र संवेगवालों में; अपि= भी;…

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  • पल दो पल

    पल दो पल ही सही,तुम साथ चलो। पल दो पल ही सही,चुप रहो, ना बोलो। ना तुम कुछ कहो, ना…

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  • सुई की नोक

    सुई की नोक पर लटकी है मेरी रूह,एक झोंका हवा, और बिखर जाएँ आँसुओं के मोती।धागे-से बंधे हैं टूटते सपने,काँपती…

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  • दिल की राख

    शायरीरात ने चाँद को भी छुपा लिया किसी बात पर,हमने भी दिल को सुला लिया हर आघात पर।अब ना तेरा…

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  • ऋषि की दुनिया

    ऋषि की दुनिया है यह ,ऋषि की पावन धरती ।सुख दुःख में एक रहे ,सुखद आनंद है वरती ।।दुनिया है…

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