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मृत्यु की नदी
रचनाकार -हरनारायण कुर्रेशिर्षक मृत्यु की नदीविधा- काव्य,श्रेणी – जीवनमृत्यु की नदी, काली जलधारा,अज्ञात तट की ओर बहती अनवरत।किनारों पर जीवन…
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मातृत्व- लघुकथा
“ये प्रथम पुरस्कार मेने नहीं मेरी मां के मातृत्व ने जीता हैं , आज मेरी मां की ममता जीत गई…
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मेरे एहसास
कैसा कुठाराघात है विश्वास पर ,वज्र प्रहार किया तूने प्यास पर ।विश्वास उठा जहर से भी अब ,कैसे विश्वास करूॅं…
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महाप्राज्ञ- आलेख
महाप्राज्ञ — यह केवल एक शब्द नहीं, यह आत्मा की पुकार है। इसमें वह दिव्य प्रकाश छिपा है जो मनुष्य…
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21वीं सदी की नारी
नारी सीमित नहीं है अब,रसोई की दहलीज़ तक,गूँज रही है आवाज़,हर दिशा, हर महफ़िल तक। वो 21वीं सदी की नारी…
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अपूर्ण सौंदर्य
कोई बग़ीचा बता दो, जहाँ गुलाब में काँटे न हों,चन्दन का वृक्ष जहाँ हो, पर विषधर लिपटे न हों। जिस…
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ऊंची उड़ान
रामेश्वरम के तट से उठी,एक छोटी सी मशाल,अखबारों में रोशनी देखी,बदल दिया हर हाल। वो मिसाइल मैन है,सपनों का रॉकेट,‘अग्नि’,…
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कर्म की तलवार
होती कर्म की भी तलवार,जिसकी होती जग में धार।शुभ कर्म जीवन का सार,कर्म ही करते जग में हार।। बन्दे शुद्ध…
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काव्य-कलाम की उड़ान
रामेश्वरम के मस्जिद वाली गली में , चुने पत्थर का घर था प्यारा। सादा जीवन, ऊँचे विचार, यही था उनका…
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अंधेरे और उजाले
अंधेरे और उजाले, उजाले और अंधेरेहर मनुष्य के जीवन में है पसरे।अंधेरों के सन्नाटे से घबराया, छटपटायाइंसान, सुकून का उजाला…
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