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  • लोकतंत्र का जश्न मनाएं

    उठें सुबह फिर निपट नहाएं !पोलिंग बूथ पर जाकर अपने !!अपनो के संग वोट दे आएं !हम अपने कर्तव्य निभाएं…

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  • किनारे पे बैठा हूँ,

    किनारे पे बैठा हूँ, निहार रहा हूँ पतवार,बहती धारा में ढूँढ रहा हूँ—टूटे मकान का आधार। तेज़ जल की कलोल…

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  • क्या प्यार भी कभी डिजिटल हो सकता है?

    प्यार तो महसूस करने वाली एक अनुभूति है क्या इसे डिजिटल बनाया जा सकता हैं? जी यही सवाल है मेरे…

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  • सिमटते दायरे

    जिंदगी में दायरे जबसिमटने लगते हैं, हमबहुत अकेला महसूस करने लगते हैं।वैसे होते तो सब है साथ,इस “अपनों” की भीड़…

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  • भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई

    उनकी लिखी पंक्तियां आज भी प्रासंगिक है –“काल के कपाल पर लिखता हूंगीत नया गाता हूंअपनों के मेले में मीत…

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  • चतुष्तैत

    (गद्य-सृजन) मानव-जीवन का सत्य केवल बाहरी जगत तक सीमित नहीं है। उसके भीतर भी चार परतें हैं, चार ध्रुव हैं,…

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  • छल-कपट

    (पद्य दोहा छंद) छल के साथी झूठ हैं, कपट सदा ही साथ।सत्य न पावे ज्योति को, अंधकार के हाथ।।1।। कपट…

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  • प्यारी पाती

    मां की आस पिता का संबल,बच्चों की अभिलाषा!प्यारी पाती आती जब थी,पुलकित घर हो जाता!! घरनी घरमें आस लगाएरहती बैठी…

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  • दृष्टिकोण

    दृष्टिकोण को परिवर्तन कर, चश्मे तेरे हेवास्तविक नज़र से देख, सितारे तेरे हे। गर देख पाये तो देख ,वो लहर…

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  • द्वैत

    कहानी बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में ऋषि वशिष्ठ रहते थे। वह अपने गहन ज्ञान…

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