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ज़िंदगी का अनसुलझा सार
टूटा बहुत इस जिन्दगी से खता की तलाश हैसमझ से अब भी परे हूँ समझनेवाले की बस आस है हर…
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नवरंग
उल्लास हैं, उमंग हैं और नव तरंग,जीवन का यही सार जिसमे हो नवरंग lये लेकर फिर आई नई आस,यही हैं…
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जीवन की सच्चाई समझो
जीवन की सच्चाई समझो कहाँ कुँआ है खाई समझो || कोई अपना कौन पराया |किसने किसका साथ निभाया ||हर मुश्किल…
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मातृ भाषा रत्न’ मानद उपाधि सम्मान-2026′ एवं ‘संत मीराबाई नव उदय सम्मान से सम्मानित डॉ ‘अनुमेहा
मुलताई/बैतूल :- बैतूल जिले के वरिष्ठ साहित्यकार स्व. नरेन्द्र पाल सिंह पुण्डीर की साहित्यकार सुपुत्री डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ को…
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साहित्य रत्न सम्मान से अलंकृत किये गये जन कवि जय प्रकाश शर्मा प्रकाश
प्रयागराज।मौलिक विचार एवं साहित्यिक सर्जना की प्रतिनिधि पत्रिका साहित्यांजलि प्रभा से प्रवर्तित साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज द्वारा इस माह का साहित्य…
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समाधि पाद – सूत्र-९
शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्यो विकल्पः। शब्दज्ञानानुपाती= जो ज्ञान शब्दजनित ज्ञान के साथ-साथ होने वाला है; {और} वस्तुशून्यः= जिसका विषय वास्तव में नहीं…
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कोई अपना होता
मैं अकेला चल रहा था साथ सपनों को लिए,मन में मैं ये सोचता था जिए अब किसके लिए?नजर धुंधली हो…
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मोक्ष के पथिक – उजाले की सुबह
गाँव की वादी अब सन्नाटे में डूबी थी,लेकिन यह सन्नाटा डर का नहीं — शांति और उम्मीद का था।रात की…
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कविता
तूफान में दिये की लौ जलाके रखिएफटे हुए मन रफू करके रखिएसुन लो किसी की सिसकियाॅं तोसिसकियों को गले लगाके…
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इंसान कहाँ मिलते हैं
बेवफ़ाओं के शहर में वफ़ा की उम्मीद रखते हैं,यहाँ दुआ मिले या न मिले, बद्दुआ भरपूर मिलते हैं। ज़ख्म पर…
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