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पध

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयन्ती

बाल्यकाल से लक्ष्मीबाई एक वीरांगना थी
अंग्रेजों से आजादी की एक कामना थी

मराठा साम्राज्य की क्षत्राणी वो एक नारी थी
समस्त अंग्रेजी शासन पर भारी थी

झाँसी की वो बहादुर महारानी थी जम्बाज़ लड़ाका शत्रु मर्दानी थी

दासता ना कूबूल ना कभी मानी थी
अठारह सौ सन्तावन की शहीद द्वितीय क्षत्राणी थी

काशी की सपूत झाँसी की बहू थी
उनके नस नस मे आजादी एक लहू थी

मकसद अंग्रेजी अन्याय से अपनी झाँसी को बचाना था
राष्ट्र संस्कृति के खातिर सूली पर चढ़ जाना था

अन्तिम समय तक हार नही मानी थी
आदिशाक्ति स्वरूपा वो झाँसी की महारानी थी

भारतीय नारी की शक्ती स्वरूप लक्ष्मी बाई स्वतन्त्रता संग्राम की आगाज़ थी
छाती चीर दे दुश्मनों की वो ऐसी आवाज थी

बचपन बीता सुनकर उनकी वीरता की कहानी
वो थी झाँसी नही सम्पूर्ण भारतवर्ष की महारानी।


संदीप सक्सेना
जबलपुर

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