
शब्द” हमेशा दिल से निकलते हैं,दिमाग से तो सिर्फ “अर्थ” निकलते हैं।अगर कुछ तोड़ना है तो किसी का रिकॉर्ड तोड़ो,किसी का दिल मत तोड़ो,उम्मीद और भरोसा,इसी में इंसान है।आवाज नहीं निकलती,पर दर्द बेइंतहा है।धर्म और ध्यान के बिना तो जी सकते हैं,पर इंसानियत के बिना नहीं जी सकते।इंसान को सिर्फ रोटी के लिए नहीं,बल्कि मालिक के मुख से निकले हर शब्द के लिए जीना चाहिए।उसके हिसाब से जीना चाहिए।बाकी:- जितना हम शास्त्रों का अध्ययन करेंगे,उतना ही हमें अपनी अज्ञानता का एहसास होगा!।
श्री ठाकुर देवघर झारखण्ड













