
अनादि आदि अंत है, ब्रम्हांड सा अनंत है।
जो है जगत चेतना,वो एक ओंकार है।
है मोह-माया से परे,जो कष्ट दीन के हरे।
जो बैठा लीन साधना,वो एक ओंकार है।
संसार से विरक्त है,सभी से जो सशक्त है।
जो है पवित्र भावना,वो एक ओंकार है।
साकार निराकार है,सभी का जो आधार है।
जो है जगत कामना,वो एक ओंकार है।।
जग पालनहार है, कर्ता है करतार है।
जो मोक्ष मुक्ति द्वार है,वो एक ओंकार है।
ब्रम्हांड की पराशक्ति,देव मुनियों की भक्ति।
जो ब्रम्ह वेद सार है,वो एक ओंकार है।
देह चलती साँस है,दिव्य ज्ञान उजास है।
जो जन्म-मृत्यु तार है,वो एक ओंकार है।
सर्व गुणों की खान है,गुणी है प्रज्ञावान है।
जो ज्ञान का भण्डार है,वो एक ओंकार है।।
एकांत में निवास है, सुमधुर सुवास है।
अमृत है अंगार है,वो एक ओंकार है।
धूप भी है छाँव भी है, डूबते की नाव भी है।
सत्य की पतवार है,वो एक ओंकार है।
अति पवित्र नाद है,ज्ञानरूपी संवाद है।
धनुष की टंकार है,वो एक ओंकार है।
सभी से जो महान है,क्षमा दयानिधान है।
सृजन है संहार है,वो एक ओंकार है।।
राम जी तिवारी"राम"
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)













