Vijay Kumar
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साहित्य
मझधार
सब फंसे मझधार मेंतलाशते फिर रहे है किनारा,पढ़ लिख कर घूम रहेकैसे चलेगा दुनिया में गुजारा।बांह चढ़ा कर घूम रहेजीवन…
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साहित्य
जिज्ञासा
सब कुछ तेरा, कुछ नहीं मेरा,मन क्यों भटके देख सबेरा।रंग बिरंगी इस दुनिया का,तु ही तो बस एक रचयिता। अंग…
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नारी की कहानी
नारी की कहानी सुना रही हूँ अपनी ज़ुबानी।सदा पूरी करती हैं अबला सबकी मनमानी।। जग की हर औरत अपने घर…
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साहित्य
मेरा भारत महान
दिलों में प्यार की खुशबू,बसाकर हम भी देखेंगे,वतन पर जान ये अपनी,लुटाकर हम भी देखेंगे। अनेकता में एकता की,मिसाल-ए-हिन्द ज़िंदा…
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साहित्य
हर झलक में तुम
हर जगह, हर मोड़, हर मंज़र में तुम,धूप में, छाँव में, हर लम्हे भर में तुम। हवा जब भी चली,…
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साहित्य
माँ की ममता
जन्नत को मैंने देखा नहीं, हाँ माँ की सूरत देखा है।ईश्वर को मैंने देखा नहीं, हाँ मूरत उनकी देखा है।…
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साहित्य
बाबा का सच — जो दबा था, दफ़न नहीं हुआ था
देवकीनंदन ने काँपते हाथों से अपना गमछा उठायाऔर चेहरा पोंछ लिया।उसकी साँसें भारी थीं—जैसे वह कोई सच नहीं,अपने भीतर बरसों…
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साहित्य
लौटता हुआ अतीत, टूटता हुआ वर्तमान
उस रात अँधेरा कुछ ज़्यादा ही भारी था।हवा में ठंड नहीं थी, बल्कि एक ऐसी खामोशी घुली हुई थी, जो…
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साहित्य
कल्पनाओं का संसार
जहाँ मुमकिन है हर मंजर,वह दुनिया ढूँढ लेती हूँ,हकीकत से ज़रा हटकर,वह दुनिया ढूँढ लेता हूँ। परिंदों की तरह उड़ती…
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साहित्य
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’: जीवन वृत्त
ईश्वर की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद से अब तक मेरे नौ काव्य-संग्रह; “आदित्यायन”, “आदित्यायन–अनुभूति”, “आदित्यायन–संकल्प”, “आदित्यायन–अभिलाषा”, “आदित्यायन–सृजन”, “आदित्यायन–भुवन राममय”,…
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