Vijay Kumar
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साहित्य
घर का रोगी, घर का वैद्य
पानी में गुड डालिए,बीत जाए जब रात,सुबह छानकर पीजिए,अच्छे हों हालात।धनिया की पत्ती मसल,बूंद नैन में डार,दुखती अँखियां ठीक हों,पल…
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साहित्य
राह चिह्नित हैं
राह चिह्नित हैं,बस चलना बाकी है।थोड़े कठिन हैं मगर,बस संभलना बाकी है।मंज़िल दूर सही,हौसला रखना बाकी है।जीत इंतज़ार में है,बस…
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साहित्य
मन संन्यासी हो गया
मन संन्यासी हो गया, बदल गई हर राह,सूनी आँखों में बस गई, प्रभु दर्शन की चाह।जिनको अपना मान लिया, वे…
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साहित्य
कहां से चले थे कहां तक आ गए,
कहां तक और आगे को जाना है, कैसे कैसे करतब दिखाए कभी जवानी में, कैसे कैसे करतब दिखाते हुए रहना…
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साहित्य
मात-पिता – इस जगत के साक्षात भगवान
मात-पिता हैं इस जगत में साक्षात भगवान,मेरी नज़रों में मात-पिता हैं महान।मात के चरणों में झुकता है सारा जहान,मात-पिता के…
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साहित्य
रहगुजर
तेरी रहगुजर से गुजरेंगे ना कभी मौसम के बहकजाने का आज भी डर हैमंजिले तो ठुकराई है यार ना जाने…
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साहित्य
कारगिल विजय दिवस
कारगिल के धवल गिरि पर दुश्मनों ना ललकारा था,कुदृष्टि से दुश्मनी ने भारत को निहारा था,छिपकर बैठे हुए थे बनाकर…
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साहित्य
दर्पण जब पाषाणों के साथ साथ रहें
दर्पण जब पाषाणों के साथ साथ रहें,उन दोनो में मित्रता भी गहरी होती है,दोनो नहीं सोचते आपस में टकराने की,तब…
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साहित्य
बाबू शोभानाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में २५ जुलाई शनिवार को पुणे इकाई की मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई ।
इस गोष्ठी की अध्यक्षता आदरणीय श्री अयोध्या प्रसाद द्विवेदी जी ने की और मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय उर्वशी…
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साहित्य
कविता
दिल को दिल से शुक्रिया अदा किया करो, करो तुम कुछ भी मगर पुराने दोस्तों को याद भी कर लिया…
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