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  • मेरा प्यार,मेरा सुरूर।

    जब घना अंधियारा छाया हो,या खुशियों का संदेशा आया हो।मन्नू बस प्यार की मुझे जरूरत है,या यह केवल मेरे दिल…

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  • कलयुग

    शीर्षक-रिश्तों का पतन और कितना गिरेगा इंसान,कब तक ये आँखें मूँदेगा?खुदगर्जी के इस अंधेरे में,अपनों को कब तक यूँ ढूँढेगा?…

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  • बोझिल पलकें

    बोझिल पलकेंबिखरी अलकें।टूटता दंभ।चल रहा था भीतरएक अनकहा अंतर्द्वंद्व। बयां कर रही थींकुछ अधूरा-सा सुकून,मन की चुप आवाज़,जिम्मेदारियों का बोझ,भविष्य…

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  • अनुवाद वैश्विक भाषाओं की आत्मा है

    डॉ मृदुल कीर्ति (अमेरिका) साझा संसार फाऊंडेशन की पहल पर, ‘अन्तर्राष्ट्रीय अनुवाद काव्य-पाठ’ ऑनलाइन आयोजन,डॉ मृदुल कीर्ति (अमेरिका) की अध्यक्षता…

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  • समाधि पाद सूत्र–४५

    सूक्ष्म विषयत्वं चाऽलिंग पर्यवसानम् । च= तथा; सूक्ष्मविषयत्वम्= सूक्ष्मविषयता; आलिङ्गपर्यवसानम्= प्रकृति पर्यंत है । अनुवाद– और सूक्ष्म विषयता आलिंग प्रकृतिपर्यन्त…

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  • समाधि पाद सूत्र– ४४

    एतयैव सविचारा निर्विचारा च सूक्ष्म विषया व्याख्याता । एतया= इसीसे {पूर्वोक्त सवितर्क और निर्वितर्क के वर्णन से ही}; सूक्ष्मविषया= सूक्ष्म…

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  • मुट्ठी भर आकाश

    पथ ढूंढती है आज भी स्त्रीमनहोकर अपने में ग़ुम, उन्मन।अपने आप को कोशिश की ढूंढने की,सम्मुख असुर आए, लहूलुहान कर…

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  • मोक्ष के पथिक

    रात का नदी–तट बिहार के उस छोटे से गाँव में रात आज कुछ अलग थी।हवा धीरे बह रही थी, पर…

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  • कलयुग

    कलयुग चरम पर आ रहा है ,देखो कैसा कहर बरपा रहा है ।निस्वार्थ अब रहा न कुछ भी ,स्वार्थ ही…

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  • मेरा बेटा सुपरस्टार

    ​सुबह की पहली किरण है तू,बेटा मेरे घर की रौनक है तू,तू चलता है तो बजती है शहनाई,तू हंसता है…

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