Uncategorized
-
जाग जाग सनातन जाग
जाग जाग रे सनातन जाग ,फुफकार रहा सामने नाग ।खिलखिलाया अबतक जो ,हो रहा है मायूस वह बाग ।।या तो…
Read More » -
मृत तट
किनारे पर बैठकर नज़ारा देख रहा हूँ,साहिल से टकरा-टकरा कर दम तोड़ता समंदर देख रहा हूँ। बहुत मुश्किल है —…
Read More » -
अव्वल बने ला हमरा भीड़ चाहीं
अव्वल बने ला हमरा भीड़ चाहीं ,गिनावे खातिर ढेरे ढेर सिर चाहीं।परिणाम देवे के बा हमरा अपने ,अपने नाम के…
Read More » -
मांसाहार
पंचपातक में वर्णित “मांसाहार” तीसरा पातक माना गया है, जो शरीर, मन और आत्मा तीनों की पवित्रता को कलुषित कर…
Read More » -
मेहंदी
तेरे प्रीत की दस्तक है मेहंदी।सुहागिनों की सौगात है मेहंदी।गहरी प्रेम की धारा है मेहंदी।दो दिलों की लाल गहरा रंग…
Read More » -
अलबेला मौसम आया
धूप ने आज जलाया,पसीने से खूब भिगोया।ठंड में बारिश से भिगोया,देखो, अलबेला मौसम आया।। कभी धूप तो कभी छांव,कभी बारिश…
Read More » -
छठी मईया की भक्ति को समर्पित रही कल्पकथा काव्य संध्या।
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु…
Read More » -
चरणामृत और पंचामृत
‘ ।। चरणामृत और पं भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप को स्नान कराने के बाद जो जल कटोरी में आता…
Read More » -
समाधि पाद सूत्र– २७
तस्य वाचक: प्रणव: तस्य= उस ईश्वर का; वाचकः= वाचक {नाम}; प्रणव:= प्रणव {ॐकार} है । अनुवाद– उस ईश्वर का वाचक…
Read More » -
समाधि पाद– सूत्र २६
पूर्वेषामपि गुरु: कालेनानवच्छेदात् । {वह ईश्वर सबके} पूर्वेषाम्= पूर्वजों का; अपि= भी; गुरु:= गुरु है; कालेन अनवच्छेदात्= क्योंकि उसका काल…
Read More »









