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  • मार्ग की सीख

    विषय- अनजाने रास्तेविधा- कविता ये रास्ते कहाँ जा रहे हैं,हमें कितना कुछ सीखा रहे हैं lबस पहुँचने ही वाले हैं,ऐसा…

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  • निर्वाण की खोज में

    (बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष) इस धरा पर जन्म पाया मनुज रूप मेंहुई निश्चित कुछ विधाएं जीवन के नित**राज्य धर्म, पुत्र…

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  • यकीं

    यकीं है नही एक दूजे पर बस जिंदगी की डोर पकड़े चले जा रहे हैकुछ उसकी मजबूरियाँ कुछ हमारे सितम…

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  • सौंदर्य लाडली का

    प्रारंभी नेह:श्री किशोरी राधा रानी का, रूप सौंदर्य अद्भुत है ।प्रेम से जब देखे भक्तों को, मुग्ध माधुर्य अद्भुत है।।…

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  • शीर्षक: मैं हूँ पक्षी मित्र

    कविता मौलिक रचनामैं हूँ पक्षी मित्र—दाना, पानी, प्यार,नन्हें पंखों में बसता मेरा संसार। न काटो वन, न छीनो उनका घर,चहकेंगे…

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  • पूर्णिका

    हो जाए जो हो जाने दो।जश्न जीवन को मनाने दो।। कब मिलते हैं ऐसे मौके।अब चाह को आजमाने दो।। बहुत…

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  • लेख- तकनीक ने छीनी पहचान।

    आज का मनुष्य तकनीक का गुलाम हो गया है। तकनीक ने सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचाया है। हम हर…

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  • जनगणना

    घर-घर दस्तक देती टोली | घर-घर दस्तक देती टोली |लेकर प्रश्नों की इक झोली ||नाम पता और उम्र पूछती |वह…

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  • कैसा जमाना आया है ?

    कैसा जमाना आया है ?सही, झूठ देख घबराया है,सारे जहाँ के बुरे कृत्य कर,पापी शान से मुस्काया है..कैसा जमाना आया…

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  • विश्व मजदूर दिवस

    महात्मा गांधी का कहना किसीदेश का विकास वहाँ के कामगारोंऔर किसानों पर निर्भर करता है,उनके बिना विकास संभव नहीं है।…

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