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  • भावपल्लवन

    (गद्य सृजन) श्लोक:-“ते हस्तेन प्रसृतं गृह्णन्ति यस्यैव भूषणं तस्य भुञ्जते।” महाभारत शांति पर्व (अध्याय/श्लोक ,159/21)भावार्थ: जो अपने हाथों से परिश्रम…

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  • मेरा स्कूल

    कितना सुन्दर है मेरा स्कूल,इसमें रंग बिरंगे है फूल।फूल सुहाने सबको भाते,उन्हें देख कर सब हरसाते।। सबसे प्यारा मेरा स्कूल,जिसको…

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  • जब मन में निराशा छाने लगे

    जब मन में निराशा छाने लगे,सँवारो खुद को — जैसे कोई त्योहार हो चले।थैला टाँगो बाहों में,पैसा जेब में हो…

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  • आज बोलो

    बोलो मुझ तक आओगे?या यूं ही चलते जाओगे? शबरी की भांति बरसों सेमैं राह तुम्हारी तकती हूं।साथ चले बरसों बीतेक्या…

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  • आशाओं के दीप

    मन में आशाओं के दीप जलाना।बन्दे तुम सदा आगे बढ़ते जाना। जीवन में बन्दे सब देते हैं धोखा।तू जीवन में…

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  • सौ दिन पत्नी के एक दिन पति का

    मेरे पिया तुम सदा मेरे हो बादशाह,सौ दिन पत्नी के,दिन एक पति का,कहानी यह पुरानी तू राजा दिल का। साजन…

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  • तिरंगे में लिपट लाश घर आयेगी

    देश का वास्तविक अभिनेता,देश का असली हीरो कौन,पर्दे पर अभिनय करने वालेया जो रहते हैं अक्सर मौन। मैं सीधे सीधे…

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  • आस्था का महापर्व छठ पूजा

    भारत में सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ। मूलतः सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया…

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  • आँगन बुलाता है

    ​आँगन बुलाता है,सुन ले पुकार।यादों की डोरी,ले जाए पार।। वो मिट्टी की खुशबू,वो बचपन का शोर,दौड़ी चली आ,थाम ले ये…

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  • एक अंधेरी रात

    विधा : विषादरचनाकार : कौशल अँधेरी रात में मन रोता रहतायादों का बोझ दिल तोड़ता रहता सन्नाटा चीर के पीड़ा…

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