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  • समाधि पाद सूत्र– २९

    ततः प्रत्येक्चेतनाधिगमोऽप्यन्तराया भावश्च । ततः= उक्त साधन से; अन्तरायाभाव= विघ्नों का अभाव; च= और; प्रत्यक्चेतनाधिगमः= अन्तरात्मा के स्वरूप का ज्ञान;…

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  • दो राहें

    एक राह थी — जिसको मंज़िल नहीं,दूजी राह — जिस पर तू नहीं।मैं वीरान जंगल में खड़ा हूँ,सोचता हूँ अब…

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  • कुसंग— स्वरचित कविता

    (१)धीरे-धीरे मन में घुलता, मुस्कान भरा ज़हर,झूठ लपेटे सत्य को, दिखे बड़ा ही सुन्दर।पहले लगता साथ मधुर, फिर बाँध ले…

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  • महिमा अगम अपार है छठी मैया

    " मैया की महिमा अपार हे छठी माता मैया के घाट पर व्रती बहुत हैं हाथ जोड़ पनियां में खाड़"…

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  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय और आधुनिक भारत

    पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी आधुनिक भारत के उन युगनिर्माताओं में से एक हैं, जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का साधन…

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  • तुम्हारा न होना

    कई दिनों से सूरज तो आता है मेरी देहरी पर प्रभात की उंगली थामें किन्तु मेरी देहरी में धूप ही…

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  • मन करता है।

    लहरों पर घर बनाने का मन करता है,मौजों में डूब जाने का मन करता है।एक अपना भी आशियाना हो तरंगों…

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  • बरिखा

    तू कईसन बाड़ू ए बरिखा ,तोहर अलगे चले चरीखा ।हॅंसुआ लगन खुरपी बियाह ,का तोहर ईहे बाटे तरीका ।।कईसे होई…

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  • लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल

    आओ सुनाएं पटेल जी की अमर कहानीलौह पुरुष कहलाते थे ऐसी अद्भुत छवि निरालीना कभी देखी ना, ना सोची कभीगरीबों…

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  • पंचवटी का आंगन

    कौशल जहाँ मिट्टी की खुशबू में, राम-सीता के पग निशान,वहीं उगे पाँचों पावन वृक्ष, बन जाएँ ज्ञान विधान।बरगद देता साहस…

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