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अन्नप्राशन संस्कार
भारतीय संस्कृति में मानव जीवन को आरंभ से ही संस्कारों की पवित्र श्रृंखला से जोड़ा गया है। इन सोलह संस्कारों…
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चुनाव
शीर्षक : पाॅंच साल के जीवन बीमाजल्दी जल्दी चलीं मत चलीं धीमा ,आईल बा पंचवर्षीय जीवन बीमा ।ओकरे के रउआ…
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समाधिपाद सूत्र– ३४
प्रच्छर्दनविधारणाभ्याँ वा प्राणस्य ।वा= अथवा; प्राणस्य= प्राण वायु को; प्रच्छर्दनविधारणाभ्याम्= बारम्बार बाहर निकलने और रोकने अभ्यास से भी {चित्त निर्मल…
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समाधि पाद सूत्र– ३३
मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुखदु:खपुण्यापुण्य विषयाणां भावनातश्चित्त प्रसादनम् ।सुखदु:खपुण्यापुण्यविषयाणाम्= सुखी, दु:खी, पुण्यात्मा और पापात्मा– ये चारों जिनके क्रम से विषय हैं ऐसी; मैत्रीकरकरुणा…
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किस मिट्टी का बना है ये इंसान?
किस मिट्टी का बना है ये इंसान,लोहे सा मज़बूत, अडिग, महान।तूफानों में भी अचल खड़ा,हर वार झेलकर भी अड़ा। गालियाँ…
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विशेष लेख
‘ पं. बलराम शरण शुक्ल”।। बीमारियों का सबसे बड़ा कारण ।। ।। प नी र ।। मनुष्य स्वयं को कितना…
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मैं सड़क हूँ
हाल सुनिएगा बालसी रोड सरायपाली चलते हैं मुझ पर सब,पर कोई न पहचाने दर्द मेरा। धूप में झुलसूँ, बारिश में…
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समाधि पाद सूत्र– ३२*
तत्प्रतिषेधार्थमेकतत्वाभ्यासः । तत्प्रतिषेधार्थम्= उनको दूर करने के लिए; एकतत्वाभ्यास:= एक तत्व का अभ्यास {करना चाहिए} । अनुवाद– उन विघ्नों को…
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समाधिपाद सूत्र–३१
दु:खदौर्मनस्याऽङ्गमेजयत्वश्वासप्रश्वासा विक्षेप सहभुवः । दुखदौर्मनस्याऽङ्गमेजयत्व श्वासप्रश्वासा:= दु:ख दौर्मनस्य, अंगमेजयत्व श्वास और प्रश्वास– ये पाँच विघ्न, विक्षेपसहभुवः= विक्षेपण के साथ-साथ होने…
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गद्यसृजन (भावपल्लवन)
श्लोक:“संस्कारो हि मनुष्याणां श्रेष्ठतामापदस्यति।”(अर्थ: संस्कार ही मनुष्य को श्रेष्ठता प्रदान करते हैं।) यह श्लोक मानव जीवन में संस्कारों के महत्व…
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