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  • प्यार का क्षितिज

    प्यार का क्षितिज धरती आसमान जहां मिलते हैं, क्षितिज वही कहलाता है। प्यार की पूर्णता का परिचायक क्षितिज, सबको कहां…

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  • छठी मइया के आँगन

    नदिया के किनारे सजल भोर आई,घाट पे उमड़ी श्रद्धा की परछाई।अरघ देत अँधियार में जोती जली,सूरज देव के चरणन में…

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  • दो आत्माओं का संग

    साउथ अफ्रीका की धूप में,एक राह पर दो छायाएँ चलीं।गांधी और कालनबैक —मन के गहरे बंधन में बसी,आध्यात्मिक मित्रता,सद्भाव और…

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  • क्यों करें अभिमान

    न तन अपना न श्वास ही अपनी ,कहाॅं पड़ा अब ज्ञान रे ।न कुछ अपना न सपना अपना ,क्यों करें…

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  • कविता- प्रकृति

    प्रकृति की लीला कितनी न्यारी,कहीं बरसता झमझम पानी,नदियाँ बहती कलकल – छलछल,और कहीं उफनाता है पानी।जरा देखिये ये,प्रकृति की लीला…

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  • भारत की जनजातीय विरासत

    जागो जागो रे मेरे प्यारे भारत के वीरों,इसे बचाकर भारत के बन जाओ हीरो।भारत की जनजाति विरासत हैं प्यारी,भारत की…

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  • शून्य में सजीव – गुरु का उपहार

    शून्य था वह—न नाम, न रूप, न कोई भी आकार था,शांत तरंगों में डूबा, बस स्वयं का ही विचार था।न…

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  • छठ पूजा

    सूर्य देव की होती पूजा,गंगा तट पर जलते दीये।छठ मैया का व्रत है पावन,सुख-समृद्धि सबको दीये। ​बाँस की टोकरी,कोसी भरा…

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  • धीरे-धीरे चुपके से

    धीरे-धीरे चुपके सेसिंदूरी लाल पूर्ण चंद्रक्षितिज पर हुआ उदित।संग सुगंधित पवन मंद्रधरा ने आंखें खोली धीरे से।निभृत निशिथ,झीना झीनापरदे सा…

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  • हरियाली

    कवि: ओम कश्यप धरती पर आई हरियाली,मन में छा गई खुशहाली।पत्तों ने ओढ़ी नई चादर,फूलों में महकी सुरभि प्याली।। आसमान…

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