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गाँधीवादी विचारों की प्रासंगिकता
महात्मा गाँधी के विचारों की प्राथमिकता सत्य, अहिंसा, स्वराज (स्व-शासन), और सर्वोदय (सभी का कल्याण) थे। उनके दर्शन का मूल…
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अतीत की चुभन
संवेदनाओं के परिष्कृत रूप में,अतीत का उभरता मसला,पुराने घावों को फिर कुरेद गया,वादों की अधूरी झलकहर पल मुझे जगा गया।…
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बिन पते की चिट्ठी।।
लौट आई ,वह बिना पते की चिट्ठी, जब डाकिए ने आकर कहा, वहा अब कोई इंसां नही बसता,थी गुलज़ार कभी…
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अंतरराष्ट्रीय शिक्षक रत्न सम्मान से सम्मानित डॉ.कृष्ण कान्त भट्ट
लुम्बिनी नेपाल बंगलुरू , सेन्ट विन्सेट पल्लोटी कालेज, भाषा विभाग , के सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कान्त भट्ट ,को अन्तरराष्ट्रीय…
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काव्यअल्हड़ सा प्रेम
अनगिनत सवालों के साथ वो नजरों का टकराना , अल्हड़ सा प्रेम था ,या था कोई अफसाना ।। वो अल्हड़…
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मुस्कान भी जरूरी है
भोर के आगमन केसाथ नई उमंगों का हीयमें प्रस्थान भी जरूरी है।रात्रि यदि बीती पलके भीगाने मेंतो प्रातः अधरों परमुस्कान…
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परिवार की चिंता
परिवार सबके जीवन की शान,परिवार से मिलता सबको मान। सबकी हिम्मत परिवार ही होता,बिन परिवार के सब कुछ खोता। मानुष…
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मैं राख हूँ — खाक तो नहीं!
तुम कहते हो — मैं राख हूँ,हाँ, मैं राख हूँ…खाक तो नहीं! माथे पर लग जाऊँ तो तिलक,भोले पर चढ़…
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जीवन में बैलेंस किधर है
सच , जीवन के आपाधापी की दौड़ मेंबैलेंस किधर हैसभी दौड़ लगा रहे इधर-उधर हैंजीवन के इस खेल में संतुलन…
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर विशेष
शीर्षक– बेटी बेटा से प्रिय होतीजब जन्म लिया बेटी नेदिल तो खटका होता।काश! एक बेटा आता तोइक चिराग तो जलता ।।…
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