Vijay Kumar
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साहित्य
गांडीव के पार (खण्डकाव्य)
डॉ. विद्यासागर उपाध्याय महाभारत के पश्चात, मौन में प्रकट होती एक नई गीता! कृष्ण ने क्या कहा, यह पूरी दुनिया…
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साहित्य
मेरे इंसाफ़ की अधूरी कहानी
मैं एक आम इंसान हूँ। नाम छापना ज़रूरी नहीं, क्योंकि ये कहानी सिर्फ मेरी नहीं है। ये हर उस शख्स…
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साहित्य
सब को सबकुछ नहीं मिलता
गाँव के आखिरी छोर पर एक छोटा-सा घर था। मिट्टी की दीवारें, खपरैल की छत, और आँगन में एक पुराना…
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साहित्य
अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस
अथक परिश्रम करते हुए हम भी शेष बचे हुए जीवन को सुदृढ़ बनाएँ व मुसकुराएँ।। एक मई का शुभ दिन…
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साहित्य
आवेशावतार भगवान नृसिंह चतुर्दशी पर सजा कल्प भेंटवार्ता मंच
हर दिन नया दिन होता है जो अवसरों से भरा होता है। – पूजा अग्रवाल प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी…
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साहित्य
बुद्ध पूर्णिमा
बैसाख पूर्णिमा का पावन उजियार,धरती पर फैला शांति का विस्तार।जग में करुणा का दीप जला,बुद्ध का संदेश हुआ साकार।। लुंबिनी…
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साहित्य
श्रमिक ईश्वर प्रतिरूप
श्रम पूजा है, श्रम ईश्वर का रूप,कर्म विधान में श्रमिक ईश्वर प्रतिरूप। मजदूर हैं मजबूर नहीं, वे श्रमजीवी,विश्वकर्मा के प्रतीक,…
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साहित्य
मजदूर
जिनके कठोर परिश्रम सेबनती है गगनचुंबी इमारतें।और बनते हैं शीश महलजिनके परिश्रम की कहानीकहती हैं हाथों पर पड़ी निशानीदो वक्त…
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साहित्य
मजदूर दिवस विशेष
दो रोटी की जंग में क्या कुछ नहीं करता है इंसानसुबह से शाम तक कोल्हू के जैसे पिसता है इंसान…
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साहित्य
श्रमिक
वह निरंतर मेहनत करता हैआलसीपन को छोड़ देता हैसर्दी गर्मी को गिनती नहीं हैनिस्वार्थ भाव से कार्य करता हैश्रमिक समाज…
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