Vijay Kumar
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साहित्य
दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत यही है कामयाबी का असली मंत्र- स्वप्निल वानखेडे़ कलेक्टर दतिया
बुंदेलखंड गौरव सम्मान समारोह एवं छात्र संवाद कार्यक्रम भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ दतिया – बुंदेलखंड गौरव सम्मान समारोह एवं…
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साहित्य
नज़र
मैं तो एक पानी का,बुद-बुदा हूँ,तेरी एक नज़र से,रौशन मेरा जहाँ है,वरना खंडहर वीराना हूँ,तेरे दर पर, अपना शीशनवाता हूँ।अच्छी…
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साहित्य
क्यों डरते हो चोरों से
जब अपने ही घर में चोर हो तो बाहर से ताला लगाने का कोई मतलब नहीं बनता है साहेब, क्योंकि…
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साहित्य
कुंभकर्ण
नग के समान काया विशाल, निरख जगत भय खाता था।कुंभकर्ण अतीव बलशाली,सुभट दशानन भ्राता था।। जब भी रखता धरती पर…
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साहित्य
जीवन की इस आपाधापी में
जीवन की इस आपाधापी मेंअंतिम साँसे ही गिनना बाक़ी है इस जीवन के तीन प्रहर बीते,अब आख़िरी प्रहर ही बाक़ी…
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साहित्य
कविता
जब नर विषयों को, निज बस कर लेता।भक्ति में समाहित वो, मेरे पास आता है।और निज चेतना को, मुझमें लगाया…
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साहित्य
कवित् विचारथोड़ा हंस कर जी लें
बेवजह कि बातों को समझे और उसे पहचानते हुए रहना सिखो, मुस्कुराहट हि जीवन का मजबूत आधार है,अपनी खुशियों को…
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साहित्य
संबंध
सत्य पर रहे अटल… थे तुम सदा ही निश्छलसंबंध तभी निभेंमार्ग से हट कर छू लें तल। सत्य पर चलना…
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साहित्य
तुम्हारे बिना
ज़िंदगी से लड़ी हूँ तुम्हारे बिना,हर खुशी भी मिली है अधूरी-सी यहाँ। रास्ते तो बहुत थे, मगर दिल ने फिर,तुम्हारी…
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साहित्य
खुशियों का खजाना
खुशियों का खजाना मन में,मुस्कानों से भरता जाए।छोटी-छोटी नेकियों से,जीवन सुंदर होता जाए। धन-दौलत से क्या मिलता है,यदि मन में…
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