Vijay Kumar
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साहित्य
आकांक्षा
-गोवर्धन थपलियालमैं जीवन भर खुद की पहचान नही कर पाया हूंदुनियादारी में फंसा रहा खुद को समझ न पाया हूंअब…
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साहित्य
नेत्रदान दिवस
भले नेत्रदान महादान होता है साहेब लेकिन लाखों करोड़ों में कोई एक ही दान करता है लेकिन जो दान करता…
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साहित्य
दोहरी सोच का समाज
कैसी समाज की सोच बनी,कैसी है आज भी आशाएं।कपड़ों से इन्सां तौलने की,कैसी रची हैं परिभाषाये।। कोई लड़की सूट पहनती…
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साहित्य
मेरे मन के गीत
जिसको लिया है जीत ,वही मेरे मन का प्रीत ,वही तो मेरे मन में बसा ,वही मेरे मन के गीत…
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साहित्य
आज युवकों की स्थिति
आज युवकों में बदलाव आतानित सेलफोन में लीन होताऑनलाइन गेम में भाग लेताअध्ययन में श्रद्ध नहीं दिखाता। दिन रात समय…
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साहित्य
नाजुक अंग हैं नेत्र हमारे, जीवन का अनुपम वरदान,
नाजुक अंग हैं नेत्र हमारे, जीवन का अनुपम वरदान, इनसे ही पहचान जगत की, इनसे ही होता सम्मान। जिसकी आँखों…
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साहित्य
अपनों को भूल गया
दर दर ठोकर खाता प्राणी, सच्चे मार्ग को भूल गया,जीवन ही एक यज्ञ है प्यारे, करना हवन को भूल गया।…
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साहित्य
मेघ , बादल , घन
विधा : पद्य चहुॅंओर है घन घना ,भानू का प्रकाश मना ,चहुॅंओर बिजली कड़क ,दिवा भी उदास बना ।विजयी हो…
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साहित्य
वृद्धाश्रम बढ़ते क्यों जा रहे
आज ये सवाल उठाए जा रहेवृद्धाश्रम बढ़ते क्यों जा रहेकभी आपने सोचा है..?बेटा पढ़- लिख कर विदेश चला जाताबड़ा पैकेज…
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साहित्य
प्रेम : समर्पण से दिखावे तक
जो छोड़कर जाने वाला हो,वह एक दिवस चला जाता है।रोक सकोगे कैसे उसको,जो पहले ही मन से जाता है। वह…
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