Vijay Kumar
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साहित्य
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस
एक मजदूर का दर्द1 मई 1886 मजदूर दिवस स्थापना की भूमिका ।1 मई 1889 मजदूर दिवस को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता।(इस दिन…
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साहित्य
कौन मजदूर
कौन समझा है किसी कोकौन किसी को समझ पायेगाऐ जीवन का पहियायूँ ही घूमता जाएगाजीवन पल पल करयूँ ही फिसलता…
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साहित्य
मजदूर है हम
मजदूर है हम |नहीं है हमें किसी बात का कोई गम |अपने खून पसीने में भीगी दाल-रोटी खाते है हम…
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साहित्य
मजदूर हूं
मजदूर हूं मजदूर हूं,घर से अपने दूर हूं,देश का नूर हूं।मजदूर हूं मजदूर हूं,मेहनत का कोहिनूर हूं। सूखी रोटी खाता…
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साहित्य
मेरी भी सुन लो…
तुम्हें आना होगा मेरे साथ,क्योंकि थक गई हूँ पीछे भागते-भागते,अब एक ठहराव की ज़रूरत है, माधव। तुम्हारी पदचापों कोअपने हृदय…
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साहित्य
मजदूर दिवस की शुभ कामना
मज़दूर दिवस की है शुभकामना,श्रमिकों का होता यह दिन आज,मेहनत मज़दूरी करें जो जीवन भररहें वह भरपेट भोजन के मोहताज।…
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साहित्य
कल्पना और हकीकत
उदय होते ह्रदय में जब, कल्पनाओं के वो मेले हैं।बहुत कुछ कष्ट देखे हैं, बहुत हमने भी हैं झेले हैं।वही…
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साहित्य
मजदूर हि समाज की प्रगति
विषय-मजदूर की आवाज कभी धूप तो कभी छांव है,मजदूर समाज कि नाव है,कब होगा उसका राज,सुनो अब मजदूर कि आवाज।…
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साहित्य
गीत
सारे अक्षर पढ़ती जा।—————————सारे अक्षर पढ़ती जा।आगे-आगे बढ़ती जा।। शहरों में और गांव मेंआज़ादी की छांव में नए इरादे गढ़ती…
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साहित्य
मेरी यादों के झरोखों में छुप कर,
मेरी यादों के झरोखों में छुप कर,वो आता है, मुस्काता है, चला जाता है।रेत पर बैठ कर मेरी, सागर के…
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