Vijay Kumar
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साहित्य
मंदिर-मस्जिद बहुत बना लिए,
मंदिर-मस्जिद बहुत बना लिए,अब दिल में एक घर बनाना है। जाति-धर्म की दीवारें छोड़,इंसान को इंसान बनाना है। भूखे को…
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साहित्य
एक भाव; कान्हा के साथ
कल हुई जो मस्त बारिश, वो एक सुहानी रात थी,दिखने में मैं एक ही थी, पर कल्पना में किसी के…
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साहित्य
विश्वास का साथ
विश्वास जीवन जीने का एक महत्वपूर्ण सोपान हैबिन विश्वास संसार नरक समान है अपने पर विश्वास या औरों पर विश्वास…
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साहित्य
पा लो मंजिल
मंजिल पा लेने की जगी है तमन्नासाथियों, अब कदम ना रूकने देनाउठो,जागो आगे बढो कि मंजिल बहुत करीब हैथककर मत…
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साहित्य
नदी की व्यथा
सांस लेने की भी नदियों को नहीं आज़ादी है,बारिशों की क्या ख़ता, न ये बाढ़ की बरबादी है । पेड़ों की सारी जड़ें एक एक कर खुलती रहीं, कंकृीट के गलियारों में झीलें सभी दबा दी है । रेत की चूड़ियाँ पहने नदी चुपचाप बहती थी,तुमने कलाई पर लोहे की हथकड़ी चढ़ा दी है। चाँद…
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साहित्य
हिन्दी हमारी राष्ट्रीय भाषा
हिंदी भाषा हिंदुस्तान हैजन-जन की वाणी हैहर दिल के धड़कन में भूली हैहिंदीहिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषाहिंदी हिंदुस्तान हैपल भर के…
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साहित्य
आदर्श शिक्षक व आदर्श शिक्षा
ऋषि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र,वेद व्यास व आदर्श गुरू संदीपन,श्रीराम व श्रीकृष्ण के शिक्षा मित्र,जिनकी शिक्षा से बने सदचरित्र। यद्यपि वे…
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साहित्य
श्री कृष्ण वाणी
(ध्यान ज्ञान और कर्म का संगम)(1) हे अर्जुन आजा तुझे दिखा दूं मैं अपना रूप कायानात साभय न करना तुम…
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साहित्य
कान्हा के संग चलूँ
मथुरा जाऊँ, वृंदावन जाऊँ, या जाऊँ द्वारिका,आगे-आगे कृष्ण कन्हैया, पीछे मेरी दुनिया। मुरली की मधुर तान सुनूँ मैं, मन हो…
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साहित्य
कविता
पता नहीं कब क्या हो जाए,पता नहीं, किसी राह में कब कौन मिल जाए, पता नहीं किस को किस बात…
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