Vijay Kumar
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साहित्य
प्रकृति का हिसाब
समय के थपेड़े भी अब दिखने लगे हैं,जैसे प्रकृति के उबाल भी अब दिखने लगे हैं।पर्वत भी पिघलने लगे हैं…
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साहित्य
जय श्री राधेकृष्ण
एक बांसुरी तान सुनाकर,सबका मन जिसने जीता,उसी यशौदा के नंदन संग,ग्वालों का बचपन बीता, यमुना के तट पर कान्हां ने,रास…
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साहित्य
हिंदी मेरी शान
हिंदी मेरी शान है, हिंदी मेरी जान,इसकी मीठी बोली में, बसता हिंदुस्तान। शब्द-शब्द में प्रेम है, स्वर में मधुरिम गान,हिंदी…
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साहित्य
एक_कश
एक दिलकश कश से ,दिल लगाना कैसा! तड़पते हुए दिल को,समझान कैसा आग है तो आग ही सहीमुंह न लगाना…
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साहित्य
मेघ
दब गईं हैं बीज की मिट्टी में जो सम्भावनाएँपात पीले पड़ गये मुरझा गयीं हैं चेतनाएँमेघ दानी हो धरा की…
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साहित्य
कृष्ण जन्माष्टमी
भादों मास, अष्टमी तिथि,रात अंधियारी।रोहिणी नक्षत्र ,खुल गई थी बेड़ियाॅं सारी।कृष्ण जन्म हुआ,सो गये थे सभी दरबान-धन्य हुए वसुदेव खुशियाॅं…
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साहित्य
श्री कृष्ण जन्माष्टमी
हरिगितिका छंद हो रही थी घनघोर वर्षा,थी रही बिजुरी डरा,वातावरण था रात का तब,अंधकारों से भरा।जो रात आई अष्टमी की,शुभ…
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साहित्य
श्री कृष्ण
आज के हमारे आराध्यश्री कृष्ण बीते हुए कल केअवतार जगत के सत गुरुश्री कृष्ण आने वाले समय के मार्ग दर्शकश्री…
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साहित्य
माँ की सिलवटें – एक उम्र का हिसाब
माँ के आँचल में जो सिक्के बंधे मिलते थे,वो सिक्के नहीं थे, उसकी दुआएँ थीं।हम समझते थे गरीबी है घर…
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साहित्य
हम दोनों
विषय : बरसातविधा : पद्य झीमी झीमी बरसात हो रही है ,दिन में देख लो रात हो रही है ,अबतक…
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