Vijay Kumar
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साहित्य
डॉ धर्मवीर भारती प्रगतिशील लेखक
“चेक बुक हो पीली या लालदाम सिक्के हों या शोहरतकह दो उनसे जो खरीदने आए होतुम्हें हर भूखा आदमी बिकाऊ…
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साहित्य
मजदूर
विधा- दोहा मुक्तक कठिन परिश्रम कर सदा,पाले निज परिवार।शीत ताप वर्षा सहे,सँग मौसम की मार।भवन कारखाने सभी, करता है निर्माण,अन्न…
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साहित्य
मजदूर
करता हूं रोज़ मजदूरी,मेहनत करना मजबूरी।बहाता हूं खूब पसीना,मिलता जब कठिन निवाला।।जितना जब जो मिल जाता,उस में ही खुशियां मनाता।सदा…
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साहित्य
गुरु पूर्णिमा पर विशेष
गुरु ही ज्ञान ध्यान जब पूजा,गुरु श्रद्धा विश्वास ।जो गुरु के गुण गौरव जाने गोविंद उसके पास ।।।। गुरु बिना…
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साहित्य
रिश्तों की कसक
सृष्टि में मानव जीवन मूल्यवानकई धर्म के लोग रहना महानइसे भिन्नव में एकता शक्तिमानकुटुंब की तरह रहना आदर्शवान। कभी कभी…
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साहित्य
मजदूर आज का
क्या बाकई में मजदूर आज कातंगी बदहाली झेल रहा?क्या बाकई में मजदूर आज काशोषण का दुःख झेल रहा ? क्या?आज…
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साहित्य
राम की महिमा अपार
राम जिनका नाम है, अयोध्या जिनका धाम है।ऐसे धनुर्धारी श्री राम को, बारम्बार प्रणाम है।। जिस सागर को बिना सेतु,लांघ…
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साहित्य
मां का ऋण
मां तूने जन्म दिया तेरा ऋण कैसे चुकाऊं,नौ महीना कोख में रख हर पीड़ा को सहा,नन्ही कली आई आंगन में…
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साहित्य
जनगणना से जनकल्याण
भारत सरकार का सपना,घर- घर की हो सबकी जनगणना।सामाजिक जिम्मेदारी का है अभियान,मेरा भारत बने महान।।1।। डिजिटल गणना की है…
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साहित्य
नुमाइश-ए-नफ़रत
यहाँ इंसान ही इंसान का अब तो शिकार है,जुबां पर प्यार है लेकिन जिगर में ज़ख्म-ए-यार है।। न दिल में…
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