Vijay Kumar
-
साहित्य
नन्हीं आँखों में
नन्हीं आँखों में सपनों का एक संसार बसा था,कंधों पर बस्ता होना था, पर श्रम का भार रखा था। जिस…
Read More » -
साहित्य
ठहर ले चलों
एक पल बस ठहर ले चलो फिर चले,ख्वाब आँखों में भर ले चलो फिर चले।प्यार की आरती द्वार पर हो…
Read More » -
साहित्य
शिक्षा और प्यार मांगते।।
विश्व बालश्रम निषेध दिवस विशेष। भीख नहीं अधिकार मांगते,शिक्षा और बस प्यार मांगते।खुब खेलना यूं हम है चाहते,हमारे चेहरे पर…
Read More » -
साहित्य
बेबसी का इज़हार
लिखा तो हमसे कुछ जाता नहीहाल-ए-दिल बयाँ किया जाता नही प्यार तुमने गर किया थाए दिल सितम हमने भी सहा…
Read More » -
साहित्य
यत्र तत्र सर्वत्र, ध्यान, मनन, चिंतन
मनुष्य जीवन लाखों जन्म के भोगोंके बाद ही बड़े भाग्य से मिलता है,यह जीवन जीना आसान नहीं होता है,परिस्थितियों से…
Read More » -
साहित्य
संशय से भरी,प्रेम निवेदन
कोई थी.. लेकिन अभी नहिं है ,पास है, लेकिन दूर कहीं है ,कभी गलत थी, लेकिन अब सही हैमहसूस होता…
Read More » -
साहित्य
बचपन और आइसक्रीम।
बचपन की उन तपती गर्मियों में मोहब्बत का मतलब कोई बड़ा इकरार नहीं, बल्कि अपनी मैंगो आइसक्रीम का सबसे मीठा…
Read More » -
साहित्य
श्रम-सुंदरी
लाल परिधान में सजी श्रम-सुंदरी,लाल चूड़ियों की मधुर खनक लिए,कानों में झिलमिल करते कुण्डल,जीवन संघर्ष को खूबसूरती से जिए। सिर…
Read More » -
साहित्य
नौतपा
नौतपा की तपती दोपहरी,सूरज आग बरसाए रे।धरती माँ की सूनी चूनर,गरमी से लहराए रे॥ पग-पग धूप बिछी है जैसे,सोने की…
Read More » -
साहित्य
ताकत का प्रकोप
कलयुग की इस नई दुनियाँ का नया ये संस्कार हैपैसे दंभ ताकत का ही सारा घमंड अहंकार है देश दुनियाँ…
Read More »









