Vijay Kumar
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साहित्य
दिल का टुकड़ा
वह तो दिल का टुकड़ा थादिल के टुकड़े का मो़ल क्या है ?दिल के समंदर में बुलबुले का मोल क्या…
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साहित्य
एक ख्वाहिश
तुम्हें पा लेने को,,बस ,तुम्हारी एक नजर ही काफी है,,,। तुम्हें मुझे अपना बना लेने को,बस ,तुम्हारी एक निगाह ही…
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साहित्य
एक आहट।।
एक हवा का झोंका बनकर तुम आए,, ।दे गए अपनी खुशबूंहर दम महकते रहने को।। देख गए अपनी मीठी यादें,फिर…
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साहित्य
बुद्ध पूर्णिमा’ — गीतिका
शांत चंद्रिका में झरे, करुणा का आलोक,जगमग हुआ अंतर्मन, मिटा अज्ञान-शोक। जन्मे जब गौतम बुद्ध, धरा हुई पावन,जीवन को मिल…
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साहित्य
मजदूर
मेहनत मजदूरी करके वहपेट कुटुंब का भरता हैसुबह से शाम तक श्रम करकेवह तनिक भी उफ्फ़ न करता है ।…
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साहित्य
अमीरी का दिखावा: ग़रीबी का छलावा
वास्तविकता है, मेहनत करने वाले को,दो जून की रोटी मुश्किल से मिल पाती है,और भीख माँगने वालों को तो बेशुमारदौलत…
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साहित्य
डूबती ममता का अमर आलिंगन
डूबती ममता का अमर आलिंगनजब जीवन डूब रहा होगा,उस मां ने अपने नन्हे को आगोश में समेटेआख़िरी बार क्या सोचा…
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साहित्य
माँ तुझे प्रणाम
परसों दिनांक 30/04/2026 दिन गुरुवार को जबलपुर मे माँ नर्मदा जी मे एक क्रुज के डूब जाने से सात आठ…
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साहित्य
गजल
काफिया — आ की बंदिशरफ़ीद — रहे 2122—2122—2122–212=26आज क्या हम लोग सारे शांति मन में पा रहे।जी रहे जीवन कृत्रिम…
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साहित्य
क्या हुआ अगर थोड़ी ख़ामोशी रखो ।
क्या हुआ अगर थोड़ी ख़ामोशी रखो ।यू रिश्तों को ही कहने दो ।।खोल दो वो सारी गांठे ।ना खुद बंधों…
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