Vijay Kumar
-
साहित्य
विधि का विधान
विधि की है निधिसृष्टि में जहां तकमानव दृष्टि है विस्तृतसीमाहीन ये जगत उसकी है माया।अनन्ता का अंतहीन जगतमानव सदियों ढूंढ…
Read More » -
साहित्य
बांझ की पीड़ा
सुहाना जब से नामकरण कार्यक्रम से लौटी थी तब से उसके कानों में बस एक ही बात गूंज रही थी…
Read More » -
साहित्य
मोबाइल हमारा सच्चा यार
मोबाइल हमारा सच्चा यार,दिन-रात बस उसी से प्यार।मम्मी बोले—“कुछ काम भी कर!”,हम बोले—“बस ये लेवल पार!” डाइट प्लान हर सोमवार…
Read More » -
साहित्य
स्नेह रखा कीजिए बरकरार
हे मनुज! हर बार स्नेह रखा कीजिए बरकरार।प्रत्येक कार्य को करने हेतु कीजिए स्वीकार।। हर किसी की प्रगति में आप…
Read More » -
साहित्य
प्रकृति और संतुलन
प्रकृति की गोद में जीवन का मधुर विस्तार,हर पत्ता, हर कण बोले संतुलन का सार।नदियाँ बहती शांत, सागर से मिल…
Read More » -
साहित्य
गीत
मेरे गीत का विषय गीतिका तुम ही हो।मेरी प्रेम कश्ति की खेवईया तुम ही हो।।पार लगा दो नाव गर प्यार…
Read More » -
साहित्य
मेरी प्यारी दादी
एक बात पूछता हूँ बताओ न दादी जी की याद मेरी आती नहीं,तुम मुझे क्यू अकेला छोड़ कर चली गई,तुम्हारे…
Read More » -
साहित्य
जिंदगी की डगर
जिंदगी है एक सफरइस डगर न जाने कल क्या होइस अनजान सफरवक्त का नहीं भरोसामन में तेरे तूफां उठान जाने…
Read More » -
साहित्य
वो आखिरी सफर
कितना सुंदर मंजर था, कितने हसीन वो पल थे,कल की फिक्र से दूर, खुशियों के कुछ कल थे। बड़ी मशक्कत…
Read More » -
साहित्य
नृत्य करो मन को साफ करो
जिंदा में नृत्य करना एक कलाइसलिए साधना करना है भलाइससे स्वास्थ बनता है निर्मलाऔर मन में खुश पैदा होता विला।…
Read More »








