Vijay Kumar
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साहित्य
कविता
ईस तरह हाल मेरा जेसे ‘कोई दुल्हन गर्मी से परेशां लाजकि देहरी लाघँ बेनकाब हो गई ।कल तक तो सबकुछ…
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साहित्य
जय बोलो श्री राम की
मैंने चोला श्रीराम का पहना,राह बड़ी बलिदान की।जय बोलो,जय बोलो श्रीराम की, जय बोलो,जय बोलो श्रीराम की जय बोलो।। गायत्री…
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साहित्य
तन तो माटी का
तन तो बना माटी का ,तन मंदिर कहलाय ।ता में है आसन बना ,जा में है देव बैठाय ।।परमात्मा अंश…
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साहित्य
ये रंग बदलते रिश्ते भी
ये रंग बदलते रिश्ते भी, कितने अजीब तमाशे हैं,चेहरों पर मुस्कान सजी, भीतर कितने निराशे हैं। कल तक जो अपने…
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साहित्य
मुझे जान से प्यारा हिंदुस्तान
सुन कल भी था मेरा देश महान,आज भी है मेरा प्यारा देश महान,मुझे जान से प्यारा अपना हिंदुस्तान। गांधी नेहरू…
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साहित्य
आँसू और साबुन
रुमाल ले लिया है किसी माह जबीन से,कब तक पसीना पोछते हम आस्तीन से।यें आंसुओ के दाग़ है आंसू ही…
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साहित्य
शब्दों की दुनियाँ
एक बात बोलूं साहेब,शब्द अपने आप में एक ताकतवर होता है, मालूम है क्या किसी को हंसा देता है तो…
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साहित्य
पैसे से बैर
पैसे से बैर है तो पैसा ठुकराता हैमुफलिसी का जहां है ना कटता है ना जाता है पैसे से यारी…
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साहित्य
परिवर्तन
कुछ मिलता है ,कुछ खोता है,क्रम अनवरत चलता है।धूप-छाँव की आँख-मिचौली बन जीवन ये चलता है। पतझड़ आता जब उपवन…
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साहित्य
आपसी मनमुटाव ठीक नही
अब बातेँ नहिं होती है ,पहले खूब, बातेँ होती थी ,फिर अचानक, बातेँ बंद हो गई, ,ना जाने क्यों, समझ…
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