Vijay Kumar
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साहित्य
इतने छुटे रे बादल मेरे हाथ से ,
मेरा मनतरस – तरस गया रे बरसात में, मेरे नयन बरस रहें हैं सारी रात से, मुझे मत बहला मिठी…
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साहित्य
मेरे पास गीता है
शब्दों की भीड़ नहीं है, मेरे पास सच्चाई है,मैं सागर जैसा हूँ, इसलिए हर नदी समाई है।उपदेश नहीं देता, खुद…
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साहित्य
मैं संतान हूं
मैं कलयुग का संतान हूंजिस मां-बाप ने जन्म दियापरवरिश कर बड़ा कियाखूब लाड़ प्यार दियाजिंदगी जीने का सहारा दियाआज उन्हें…
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साहित्य
यादों के आलिंगन में
आज भी यादों के आलिंगन में जीती हूंवो यादें भुलाए नहीं भूलती न ही भूल पाऊंगीजब तुम थी तो मैं…
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साहित्य
कोई नहीं जानता है मेरे दिल के ज़ख्मों को,
कोई नहीं जानता है मेरे दिल के ज़ख्मों को,आज भी मेरे दिल पर गहरे निशान हैं , तुमने कहा था…
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साहित्य
साथ जो है मुझे तेरा
ओ भोला भंडारी साथ जो है मुझे तेरा |जीवन में चाहे जितना भी हो अंधेरा |लेकिन भरोसा है तुझ पर…
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साहित्य
रवींद्रनाथ
सात मई अठारह सौ इकसठ ।बंगाल की धरती धन्य हुई…क्योंकि उस दिन साहित्य को,नया स्वर मिला था ।जोरासांगो के ठाकुर…
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साहित्य
‘प्रकृति’ विषय पर बनने वाले विश्व रिकार्ड में राजगढ़ से डॉ. मोहिनी गुप्ता की सहभागिता
प्रकृति संरक्षण एवं साहित्य को समर्पित अंतरराष्ट्रीय विश्व रिकॉर्ड अभियान मे *डॉ. मोहिनी गुप्ता राजगढ़ मध्य प्रदेश * से सहभागिता…
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साहित्य
भावनाएं सुन्न होने लगी है
भावनाएं सुन्न होने लगी है,,,,अंतिम संस्कार की विधि भीअब वीडियो कॉल पर होने लगी है ,,,,देखो ये कलयुगी औलादे अबकिस…
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साहित्य
संस्कार
संस्कार मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। शिक्षा से डिग्री मिलती है, पर संस्कार से इंसानियत मिलती है। जीवन में…
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