Vijay Kumar
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साहित्य
सावन की बहार
दामिनी चमके मेघा गरजे,झूम झूम के बहे पुरवाई!रिमझिम रिमझिम बरसे सावन,हर्षित मन पुलकित तन भाई!! सावन की बहार है आई!…
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साहित्य
सावन का महीना
काले-काले बादल आए, लेकर शीतल पवन,धरती की प्यास बुझाने, बरसा रिमझिम सावन।मिट्टी से उठी खुशबू, मन को बहुत सुहाती है,पेड़ों…
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साहित्य
मैं क्या हूँ, क्यों हूँ, कौन हूँ?
मैं कौन हूँ, क्यों हूँ, क्या हूँ – यह प्रश्न लिए चलता हूँ,भीड़ में रहते हुए भी, हर पल खुद…
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साहित्य
राह, नया उजास
शीर्षक:राह, नया उजास बदलाव तभी सार्थक है, जब सोच नई हो जाए,मन में आशा का दीप जले, हर राह सरल…
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साहित्य
दीप
मैं दीप हूँ,हर दिशा अंधेरों की चादर ओढ़े,एक दीप की रोशनी उस अँधेरे को चीर कर अपनी बाहों में प्रकाश…
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साहित्य
जीवन सन्ध्या
वह सुबह कभी न आएगीये रैन न अब कट पायेगीआज विभ्रम की बेला मेंजीवन सन्ध्या ढल जायेगी मंझधार हमारे भीतर…
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साहित्य
सावन लाया मधुमास
उमड़-घुमड़ के घन नभ में छाए, लेकर जल की थात।तप्त धरा के सूखे अधरों, पर बरसी सौगात।। रिमझिम-रिमझिम बूँदें गातीं,…
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साहित्य
स्वतंत्रता दिवस
सबको दिल से गले लगाएं हम|आजादी के इस पवन पर्व पर ,आओ वीर शहीदों की गाथा गाएं हम | नमन…
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साहित्य
अंग्रेजों से आजादी
साबरमती से यूं निकले बापू,वो चंपारण की नित राह चले।अहिंसा की इक लाठी उठाकर,बापू आजादी की ओर बढ चले।। सुखदेव,…
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साहित्य
सावन में शिव आएं हैं
।सावन में शिव आएं हैं। सावन में शिव आएं हैं।हम सब पर कृपा बरसाएं हैं।। जो भी गंगा जल चढातें…
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