Vijay Kumar
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साहित्य
जीवन पथ पे बढ़ते रहो
निज जीवन तुम पढ़ते रहो ,जीवन पथ तुम बढ़ते रहो ।कठिन वक्त से संघर्ष करके ,नव पथ जीवन गढ़ते रहो…
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साहित्य
बिखरे हुए ख़्वाब
लकीरों में बँटी हुई ज़िंदगी,कोनों में बिखरे हुए ख़्वाब।हर आकार कुछ कहता है,हर साया खोलता है एक नया हिसाब। बीचों-बीच…
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साहित्य
प्रेमचंद: कलम के योद्धा
न सिंहासन, न राज मुकुट न वैभव की चाह, हाथों में बस एक कलम थी, जिसने हर मन इतिहास लिखा…
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साहित्य
मुंशी प्रेमचंद
लमही के पावन आँगन से, जो बना लेखनी का अवतार,‘गोदान’ और ‘ग़बन’ की गाथा, से महकाया साहित्य-संसार।। शोषित-पीड़ित के सजल…
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साहित्य
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद: कलम के किसान: हिंदी साहित्य के सूर्य
जन्म और प्रारंभिक जीवनहिंदी साहित्य के पुरोधा मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास लमही नामक…
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साहित्य
कलम का किसान: मुंशी प्रेमचंद को समर्पण
31 जुलाई अठारह सौ अस्सी,लमही गाँव में जन्मी एक ज्योती।धनपतराय नाम, दुनिया ने कहा,प्रेमचंद हिंदी का सच्चा मोती॥ पिता मुंशी…
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साहित्य
माँ का चूल्हा
माँ के जैसा कोई प्यार नहीमाँ बिन तेरे ये संसार नही चूल्हे पर बैठ बेटे के लिये खाना पकाती हैदिन…
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साहित्य
ग़ज़ल
राह जो काबिल बहुत है ।राह वो मुश्किल बहुत है। वो नहीं भाती किसी को,बात जो बोझिल बहुत है। रख…
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साहित्य
उपन्यास सम्राट प्रेमचंद : शब्दों का अमर आलोक
कुछ नाम समय की धूल में नहीं खोते,वे युगों की चेतना बनकर जीवित रहते हैं।प्रेमचंद ऐसा ही एक नाम हैं—जिनकी…
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साहित्य
मुंशी प्रेमचन्द जयंती विशेष
कलम के सिपाही प्रेमचंदशत शत करती हूं नमन।महक उठी जिनकी कलम सेसाहित्य- क्यारी और चमन। भारत की शोषित जनता कीपीड़ा…
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