Vijay Kumar
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साहित्य
बरसती हैं तसव्वुर में वो यादें
बरखा बहार आई कैसी मुसलसल ये झडी लगाईआती तसब्वुर में वो यादें मन रुआंसा कर देती हैंकाले बादल नभ पर…
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साहित्य
शस्य-श्यामला मही माँ
मही कहूँ तुम्हें या कहूँ शस्य-श्यामली,तेरे आँचल में पलती, हर एक कोंपल हरियाली।फसलों की लहरों में, जब तू इठलाती है,लगता…
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साहित्य
प्रबल कर्मसिद्धांत
ऊक्ती- भाग्य बदल सकता है कर्म का प्रतिफल नही बदलता है जीवन के मूल मे कर्म ही प्रधान हैकर्म के…
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साहित्य
सबसे बड़ी गुलामी
सबसे बड़ी गुलामी रोटी की नहीं।सबसे बड़ी गुलामी ख्वाहिशों की है। लोहे की बेड़ी टूट जाती है।“लोग क्या कहेंगे” साथ…
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साहित्य
विश्वास
जीवन गमन में कष्ट आने सेपरीक्षा में कम अंक मिलने सेस्वस्थ की उलझनों बढ़ने सेमानसिक शांति नहीं होने सेतुम विश्वास…
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साहित्य
बिक गया सब कुछ…
पर नहीं बिका ‘विद्रोही’ – अंतिम प्रेस कॉपी वो अखबार बिक गये,वो कलम के सिपाही, वो पत्रकार बिक गये।सच लिखने…
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साहित्य
कल्प भेंटवार्ता मंच पर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एवं चंद्रशेखर आजाद को किया गया नमन
लखनऊ की वरिष्ठ साहित्यकार नीरजा नीरू कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से…
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साहित्य
छात्रों की रूदन पुकार
विधा – स्वतंत्र अपना हक मांगने पर,मिले लाठियों की मार है।भ्रष्ट शासन व्यवस्था और,तानाशाही भरमार है।। गुनहगारों को क्यों बचाती,अब…
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साहित्य
वो मखमली शाम
वो मखमली शाम,कठिन है मुझे भूल पानाजहाँ,तुझ संग मिलने को होता था,रोज आनातु भी कैसी बेताबी,करती थी मेरा इन्तेजार?ढलती सूरज।…
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साहित्य
मदनोत्सव
प्रकृति सुरभित हो गई देख काम कमानरति भी ललचा रही देने को मधु रसपानउत्साह उमंग से भरे हुये निकल पडे…
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