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गणतंत्र की गरिमा से गौरवान्वित हुई २३३वीं साप्ताहिक कल्पकथा काव्यगोष्ठी।
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु…
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तेरे धर्म का मर्म -२
व्यर्थ है श्रम तेरा !वक्त पर न कोई काम आया ।क्या कभी किसी ने ये श्रम का मूल्य चुकाया ?किस…
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तेरे धर्म का मर्म –१
कुछ लोग पैदा होते हैं —कुछ कर गुजरने के लिएवो कुछ करते ही रहते हैं —मौत आने तलक ।अफ़सोस तो…
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व्यर्थ है श्रम तेरा !
वक्त पर न कोई काम आया ।क्या कभी किसी ने ये श्रम का मूल्य चुकाया ?किस चक्कर में–तूं ने यह…
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कुछ लोग पैदा होते हैं
कुछ लोग पैदा होते हैं —कुछ कर गुजरने के लिएवो कुछ करते ही रहते हैं —मौत आने तलक ।अफ़सोस तो…
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सुपर से ऊपर हो गया जबलपुर में 24 जनवरी को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
प्रयोजन :- कविवर आज़ाद वतन वर्मा के काव्य संग्रह ‘फूल से भारत में’ का विमोचन.संचालन/संयोजन :- श्री विनोद नयन जी…
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वीर शहीदों का प्रतीक तू
हे ! तिरंगा तुझे सलाम है,,तीन रंगों का दर्पण तुझमें,,त्याग,तपस्या और वीरता,,भारत माता का रखवाला,,वीर शहीदों का प्रतीक तू।। हर भारत…
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ग़ज़ल-
हमारी शान है उतनी हमारे आशियानों में।वतन का नाम है जितना जहाँ के आसमानों में। लगा दें जान की बाज़ी…
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गणतंत्र दिवस
बड़ा पावन पर्व है यह ..देश ने निज संविधान अपनाया।26 जनवरी 1950 की तारीख कोभारत पूर्ण गणतंत्र बन पाया। है,…
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लहरे तिरंगा
आसमान में तिरंगा लहरे ,घाव किसी के होते गहरे ।पढ़ाता नासमझी पहाड़ा ,स्वयं पढ़ जाता ककहरे ।।खड़ा नहीं जो तिरंगा…
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