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षोडश संस्कारों की आवश्यकता
संस्कार शब्दका अर्थ— “सपरिभ्यां करोतौ भूषणे” इस पाणिनीय सूत्र से भूषण अर्थ में ‘सुट्’ करने पर सिद्ध होता है ।इसका…
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देव भूमि की छटा निराली
नील बितानों में लिपटी घाटीस्वपन सा मोहित हर रजकणजहाँ अरण्य नहीं बस वन हैं,जिनमें बसते परम ब्रह्म। गगन से करते…
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म्हारौ सौभाग्य
(भक्ति रस री कविता — राजस्थानी) म्हारौ सौभाग्य, पायो थारौ दरश,जीवन री नैया लागी थारा परस।जी भटकतो थो रे मरुधर…
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मेरे सुपर हीरो हैं वो,
मेरे सुपर हीरो हैं वो, जो मां भारती की सेवा में सीमा पर हैं खड़े, देशहित…
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तजुर्बा
राख बन जाने को लेकर, नफ़रतों के ढोए बोझ,अहम अपने ऊंचे रखे,दिखते रखते बैर हर रोज।। कितना था आसान असल…
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बारिश में ढहता मकान
गरजते बादल मूसलाधार बारिश,ज्यों सब्र खो चुका आसमान।हर बूंद छत पर हथौड़े सी गिरी,कांप उठा पुराना मकान।। भीतर से जर्जर…
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षोडश संस्कारों की आवश्यकता
संस्कार – कार्य के अधिकारी– अधिकार अनुसार कर्म करने की सम्यक फल की प्राप्ति होती है । संस्कार कर्म में…
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स्मृतियों के झरोखों से
स्मृतियों के झरोखों से जो देखीमां मुझे तुम बहुत याद आईमुझे आज भी तुम्हारी याद बहुतसताती हैवह मेरे लिए लजीज…
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लक्ष्य प्राप्ति की राह
आज इंसान लक्ष्य से भटक रहा है,यही भटकाव सबको थका रहा है,इस भटकाव की कथा लिख रहा हूँ,मालिक व श्वान…
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हमारे शब्द और हमारी सोच
हमारे शब्द और हमारी सोच दोनोही अत्यंत संवेदनशील होते हैं,कभी इनसे नज़दीकियाँ बढ़ती हैं,तो कभी हमारी दूरियाँ बढ़ा देते हैं।…
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