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ये आखिरी महीना ”दिसंबर”
विधा- कविताशीर्षक- लो ठंड आई वर्ष का आखिरी महीना,दिसंबर आया है।ठंड की चादर ओड,दस्तक दे पाया है।। सूरज की धूप…
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संवेदना
मन में धूप जगी जब, पावस भाव उमंग।संवेदित पुलकित मन, जागे कोमल रंग।। जीवन सफल वही है, जहाँ हृदय उदार।संवेदित…
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बाल कवियों की उर्वर कल्पना की उड़ान से सुरभित हुआ कल्पकथा काव्यगोष्ठी मंच।
होनहार विरवान के होत चीकने पात कहावत मेधावी बाल प्रतिभाओं पर एकदम सटीक बैठती है – कल्पकथा परिवार प्रभु श्री…
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स्वर कोकिला लता मंगेशकर
“ये जो आवाज सबके तन और मन मेंसमाई हैये तो स्वर्ग कोकिला लता ने अपनी सुर लय की छटा बिखराई…
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(no title)
पति तपावनी गंगा बूंद-बूंद संगृहीत कर अपनावजूद से बड़ा बनाती हैआगे बढ़ना ही जीवन हैनदियां में हमें सीखाती हैं “गंगा…
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गीता जयंती
पद १मार्गशीर्ष की एकादशी, पर्व पावन महान,ज्ञान दीप जलाने वाला, जीवन को दे ध्यान।कुरुक्षेत्र की धरती पर, हुआ सत्य का…
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उजालों का पहरा नहीं रहा
ज़हर-सी बातों का असर हवाओं पर नहीं रहा,ओस भी अब शफ़्फ़ाफ़ अपने आँचलों में नहीं रहा। शहर–शहर धूप बदनाम होकर…
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मोक्ष के पथिक
पहली परछाई का चेहरा चौराहे पर खड़ी वह आकृतिजैसे हवा में गढ़ी हुई कोई धुंध थी—धीमे-धीमे नज़दीक आती हुई,पर फिर…
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ख्वाबों का वो घर
मैंने देखा था एक ख्वाब,जब मेरा अपना घर होगा, तो पक्का नहीं…एक कच्चा-सा प्यारा घर होगा । जिसकी छत पर…
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विश्व रंग 2025 महोत्सव भोपाल में, रामा तक्षक द्वारा संपादित ‘प्रवास मेरा नया जन्म’ ‘ऋषि ऋषिकाओं की जन्मदात्री देवनागरी’ व नीदरलैंड से प्रकाशित ‘साहित्य का विश्व रंग’ पत्रिका का लोकार्पण किया गया।
यह लोकार्पण इटली से मार्को जॉली, स्वीडन से हाइंस वेसलर, शारजाह से डॉ पूर्णिमा वर्मन, श्रीलंका से डॉ निरोशा सलवतुर,…
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