Uncategorized
-
क्या लिखूं
क्या लिखूं मैं प्रभु भजन संध्या कीर्तनया लिखूं मां बाप के चरणों का वंदनक्या लिखूं मैं सनम की आंखों पर…
Read More » -
खुशियों की चाबी
विधा-काव्य इंसानी मन के सन्दुक मे खुशियाँ समायी होती हैजीवन जीने की एक लालसा दिखाई देती है इस सन्दुक मे…
Read More » -
आ गले लग जा तुम
आ गले लग जाओ तुमकि याद बहुत आती हो तुमहमदोनों ही एक ही हैतो फिर दूर क्यों खड़ी हो तुम?तुम्हारे…
Read More » -
आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती जी
महर्षि दयानंद, आर्य समाज के संस्थापक, वेदों के ज्ञाता थेउनका जन्म 12 फरवरी 1824 कोगुजरात में हुआ थाउनका मूल नाम…
Read More » -
सर्वोपरि है देश
स्वर्णिम अतीत का गान करो, दिल में आत्मीय जज़्बात भरोबने राष्ट्र सिरमौर मेरा फिर,मातृभूमि से प्यार करो। नमन करो इस…
Read More » -
सोशल मीडिया के दौर में भारतीय संस्कृति
” सभ्यता, संस्कृति जहां से जन्मी हैवो हिंद देश मेरा मतवाला हैसंस्कार जहां से पले -बढ़ेवो भारत देश निराला है”वर्तमान…
Read More » -
क्या लिखूँ
दिल में उठते दर्द को आखिर मैं क्या लिखूँ,हर तरफ़ बिखरे हुए मंजर को क्या लिखूँ। उस पत्नी की सूनी…
Read More » -
समाधि पाद – सूत्र— ६
प्रमाण विपर्ययविकल्प निद्रा स्मृतयः । प्रमाण विपर्ययविकल्पनिद्रास्मृतयः =१. प्रमाण, २.विपर्यय, ३. विकल्प, ४. निद्रा, ५.स्मृति— यह पांच हैं । अनुवाद—…
Read More » -
हे लता !
•~•~•~•~•~•~•~ (छायावाद से प्रभावित) तरु वक्ष मिला, पुष्पित पल्लवित हे लता!आंधी आए या तुफां,न छोड़ तूं संग सखा। तरु वक्ष…
Read More » -
ख़ामोशी में खुद से सवाल
आज फिर उस पल को याद कर बैठा हूँ,ख़ामोशी में खुद को ही दोष दे बैठा हूँ। क्यों मिला था…
Read More »








