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  • मोक्ष के पथिक

    (जंगल की ओर वापसी) राघव ने रातभर एक पल भी नींद नहीं ली।उसके भीतर कुछ टूट भी रहा थाऔर कुछ…

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  • भाव संस्कार : आलेख

    वर्णोंत्थान संस्कार मानव जीवन के संपूर्ण विकास का वह श्रेष्ठ आध्यात्मिक मार्ग है, जिसके माध्यम से मनुष्य केवल बोलना नहीं…

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  • मिट्टी का पुतला था मैं…

    मिट्टी का पुतला था मैं,मिट्टी में ही मिल जाना था,चार कंधों की दूरी भर—बस इतना सा सफ़र निभाना था। पर…

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  • बेटा

    शीर्षक – प्यारा बेटा ये मेरे प्यारे बेटे, तू मेरी शान है,तेरी हँसी में ही, मेरी मुस्कान हैं lतेरे अच्छे…

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  • अंतिम सांस के दर्द

    (वृद्धावस्था के संदर्भ में)कविताविषादरचनाकार -कौशलधीरे-धीरे श्वासें मंद पड़ती जाती हैं,झुर्रियों में बीता जीवन छुपा बैठा है।मन के आँगन में बिखरी…

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  • हमारा छत्तीसगढ़

    हमारे विलक्षण छत्तीसगढ़ की,मैं अदभुत बात बताती हूं। प्राकृतिक सौंदर्य से निहित,मुक्कमल राज्य की कहानी कहती हूं। विद्युत और इस्पात…

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  • तेरे बिना मैं कहाँ?

    तुमसे मोहब्बत हुईतो लगता है जैसेखुद को ही खो दिया कहींरुत भी बदल गई,चेहरे का रंग भी ढल गया,और दिल…दिल…

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  • मोक्ष के पथिक (भीतर के दरवाज़े)

    राघव अगले दिन भोर में घर लौटा।पत्नी सुनीता अंगीठी के पास बैठी थी,उसके चेहरे पर रातभर की चिंता तैर रही…

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  • दो घूॅ़ंट चाय

    जरूरी नहीं चाय कप भर पीना ,अगर जिंदगी सुंदर तुझे है जीना ,दिन भर में कितने कप तू गिना ,क्या…

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  • दिल्ली का दर्द

    दिल्ली का दिल दहला जब,गूँजी दहशत की आवाज़,ज़ख्मी हुई राजधानी,रोया हर एक समाज। मासूमों का लहू बहा,मिट गए कितने सपने,आतंक…

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