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  • अनुशासन- आलेख

    भावचतुष्टय के तृतीय आयाम “पंचविश्वास” का दूसरा चरण अनुशासन उस सेतु के समान है, जो विश्वास को केवल भावनात्मक अनुभूति…

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  • कुछ तुम लिखो, कुछ हम लिखें

    आओ चलो हम कुछ नया करेंकुछ तुम लिखो, कुछ हम लिखेंएक गीत लिखें साथ-साथ मिलकरतुम्हारी भावनाएं, हमारी रचनाएंआओ मिलकर बनाएं…

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  • ​रुला गए वो लम्हे

    मोहब्बत की हसीं महफ़िल लुटा गए वो लम्हे,दिए जो ज़ख्म गहरे थे, रुला गए वो लम्हे। कभी जो धूप में…

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  • दहेज की लोभी कलयुगी माँ

    बेटा ऊंची नाही मोहे सेज चाहिए बहू नहीं मोहे तो दहेज चाहिए,कोख मे रखी थी तुझे नौ मास मेरे लाल…

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  • बे-मशक्कत राजयोग

    कलयुग है दिमागवालों की दूनियाँ हैजिसने चला लिया बस उसके ही आगे पीछे दूनियाँ है राजयोग काबिलियत पर अब गये…

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  • दारू का जीवन

    छत्तीसगढ़ी गीत दारू मीठ–मीठ हँसाथे, पाछू आँसू दे जाय,घर–अंगना ल खाय धीरे, जिनगी राख बना जाय। पहिली–पहिली दोस्त कस लागे,…

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  • निष्ठा- कहानी

    गाँव के छोर पर एक प्राचीन पत्थर का मंदिर था, जिसकी दीवारों पर समय की लकीरें साफ़ दिखती थीं। वहाँ…

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  • सकारात्मकता

    सकारात्मक सोच की किरण जब मन में उतर जाती है,तो अँधेरी सी लगने वाली राह भी रोशन हो जाती है।निराशा…

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  • कपिलश फाउंडेशन द्वारा एक काव्य गोष्ठी

    1 फरवरी 2026 को कपिलश फाउंडेशन के बैनर तले कपिलश साहित्यकार समिति खुर्जा शाखा द्वारा एक काव्य गोष्ठी का नगर…

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  • जय हो

    चाट रहे हैंतलवेसत्ता केदलाल,कूद कूदकरखा रहेदेश कासारा माल। कवि संगम त्रिपाठी

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