Vijay Kumar
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साहित्य
समय की राह पर इंसान: अभिमान, भक्ति और विरह
कबीरा कहे पुकार के, सुधर जाओ रे इंसान,समय बड़ा बलवान है, मिट जाएगा अभिमान। आज जो ऊँचा उड़ रहे, कल…
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साहित्य
विनायक वन्दना
जय विनायक, गजमुख धारी,सिद्धि विनायक, संकट हारी,प्रथम पूज्य हो जग में सारे,तेरे चरणों में हैं शीश हमारे। मूषक वाहन, पीताम्बर…
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साहित्य
ईश वंदना
मेरे जीवन को सुखमय बनाने वाले आप हों प्रभु जी, मेरा ईष्ट भी आप हों औरमेरा विश्वास भी आप हों…
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साहित्य
जीवन चंद दिनों का मेला है
जीवन चंद दिनों का मेला हैयहाँ सुख दुख का झमेला है जीवन रंगमंच की तरह हैअपना अपना रोल करना है…
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साहित्य
बारिश और किसान
धर्मेंद्र कुमार राठौरव्याख्याता भौतिक विज्ञान झालावाड़राजस्थान आषाढ़ और सावन का महीना आते ही भारतीय किसान की आँखों में नई उम्मीदें…
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साहित्य
सूने है आषाढ़ के बादल,
दूर दूर तक पानी कानामो -निशान नहीं , खेत सूखे फसलें सूखी, तालाब भी सूखा हिदिख रहा । हर आदमी…
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साहित्य
शून्य : पूर्णता, अनन्त और मानव जीवन का शाश्वत रहस्य
1. प्रस्तावना “शून्य वह नहीं जिसमें कुछ भी नहीं है; शून्य वह है जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि के जन्म की सम्भावना…
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साहित्य
विश्व इमोजी दिवस
मौन अधरों की भाषा बन,मन का सारा हाल कहे।बिन बोले जो भाव जगा दे,वह मुस्कानों का कमल रहे। कभी हँसी…
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साहित्य
मै बालक हूं
मै नन्हे मुन्हे खूब सूरत बालक हूंमुझ को पढ़ने केलिए शक्ति चाहिएइससे मेरी आशाओं सफल होते हैमैं देश केलिए सुनागरिक…
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साहित्य
इमोजी
चेहरे पर जो मुस्कान नहीं,वो अब इमोजी बन जाती है,दिल की हर अनकही धड़कन,स्क्रीन पर आकर मुस्काती है। कभी 😊…
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