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  • पितृपक्ष तर्पण एवं श्राद्ध की महिमा

    जीवितो वाक्यकरणात् क्षयाहे भूरि भोजनात् ।गयायां पिण्डदानाच्च त्रिभिः पुत्रस्य पुत्रता ।। परम्परानुसार पुत्र का पुत्रत्व तभी सार्थक होता है, जब…

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  • हिंदी की वैज्ञानिकता

    (स्वरचित नाटक – मंचन समय : लगभग 25 मिनट) ⏱️ समय विभाजनप्रारम्भ : (संचालक + प्रधानाचार्य) – 3 मिनटप्रथम दृश्य…

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  • बात जो बाकी रही

    देखते ही देखते, वह देखना जो प्यार हो रही, कहते कैसे,बात मन की बात जो बाकी रही?? दिन गुज़ारे, माह…

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  • तक़दीर का परिंदा

    तक़दीर का परिंदा कहाँ रहता है, किसे पता,चाल में, ढाल में, राह में,सच में, झूठ में—या फिर बिकता है कहीं…

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  • नौ की शक्ति, आज का संदेश

    आज की तारीख 9/9/2025 है।अगर हम इसे देखें: तारीख = 9 महीना = 9 वर्ष 2025 → 2 + 0…

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  • हिंदी दिवस

    (१४ सितम्बर) काव्य रचना हिंदी है आत्मा भारत की, हिंदी है पहचान,हिंदी से ही जग में गूँजे, अपने मन का…

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  • नारी और मर्यादा

    “पंखों में ही शक्ति है हौसलों से उड़ान होती हैजब भी आगे बढ़कर करती है कुछ कामहमेशा करते रहें नारी…

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  • नारी और मर्यादा

    “पंखों में ही शक्ति है हौसलों से उड़ान होती हैजब भी आगे बढ़कर करती है कुछ कामहमेशा करते रहें नारी…

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  • सत्य मिथ्या गमन

    सत्य गमने प्रकाश बना ,मिथ्या गमने बना अंधेर ।सत्य हेतु ही दिवा बना ,असत्य निशा कहे टेर ।।दिवा निशा मध्य…

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  • अक्षरों का वृक्ष — हिंदी

    अक्षरों के वृक्ष से हीशब्दों की दुनिया सजती है,शब्द–ध्वनियां सुनकर हीज़िंदगी फिर सँवरती है।। इसकी छाँव तले मिलताज्ञान और संस्कार…

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