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भावपल्लवन
श्लोक:-जातकर्म नामकरणं निष्क्रमणमथान्नदम्।चूडाकर्म च कर्तव्यमिति धर्मविदो विदुः।।(मनुस्मृति 2.27)अर्थ: धर्मज्ञ पुरुषों ने कहा है कि जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन और चूड़ाकर्म,…
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ये सन्नाटे
ये सन्नाटेजब जुबां साथ नहीं देती है,मन के भाव उमड़ते हैं तब,सन्नाटे बोलते हैं।आंसुओं को पलकें रोक लेती हैं,बंद आंखें…
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समाधि पाद सूत्र– ४०
परमाणुपरममहत्त्वान्तोऽस्य वशीकारः । {उस समय} अस्य= इसका; परमाणुपरम महत्त्वान्तः= परमाणु से लेकर परम महत्व तक; वशीकार:= वशीकार {हो जाता है}…
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आभार—समर्पण
(डॉ. गुंडाल विजय कुमार जी के लिए) आपकी वाणी में करुणा है,आपके कर्म में सेवा है।हर दिल को जो छू…
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तेरी ख़ुशबू नहीं ला पाता हूँ…
अगर तू नहीं मिलेगा, तो ऐसा थोड़े हैं कि मर जाएंगे हम,हाँ, ये सच है… तेरे इश्क़ में उन गलियों…
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भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति का वैश्विक योगदान है या नहीं है ?
भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति का वैश्विक योगदान पूर्ण रूप से देखा जा सकता है। भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता…
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अन्नप्राशन संस्कार
भारतीय संस्कृति में मानव जीवन को आरंभ से ही संस्कारों की पवित्र श्रृंखला से जोड़ा गया है। इन सोलह संस्कारों…
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समाधि पाद सूत्र– ३९
यथाऽभिमतध्यानाद्वा । यथाऽभिमतध्यानात्= जिसको जो अभिमत हो उसके ध्यान से; वा= भी; {मन स्थिर हो जाता है} ।अनुवाद– अभीष्ट विषय…
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समाधि पाद सूत्र– ३८
स्वप्ननिद्राज्ञानालम्बनं वा ।स्वप्ननिद्राज्ञानालम्बनम्= स्वप्न और निद्रा के ज्ञान का अवलम्बन करने वाला चित्त; वा= भी; {स्थिर हो सकता है} ।…
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समाधिपाद सूत्र– ३७
वीतराग विषयं वा चित्तम । वीतरागविषयम्= वीतराग को विषय करने वाला; चित्तम; चित्त; वा= भी {स्थिर हो जाता है} ।…
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