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  • नेता अभिनेता

    बैंजू ढोल अरु बाजे खूब झाल ,नेता नगरी में भरल बाटे माल ।एक एक सब कुछ नजर में आई ,जब…

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  • छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस

    1 नवंबर 2000 “छत्तीसगढ़ हमको जान से प्यारा है छत्तीसगढ़ हमको जान से प्यारा है,सोनचिरैया राज्य हमारा है।हरियाली से भरा…

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  • पंचपातक : पतन की पाँच धाराएँ

    (नशा, म्लेक्षता, मांसाहार, मुफ्तखोरी और कुसंग) नशा विवेक हरै, अंधा करि दे, मन भ्रम-जाल पसार।ज्ञान सुधा बिसराय प्राणी, खोजे विष…

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  • “कब आओगे, प्रिय”

    कब आओगे, प्रियप्राण-पखेरू छूट रहे हैं,शाखाओं से पत्ते झर रहे हैं,टहनियाँ अपने आप ही टूट रही हैं —कब आओगे, प्रिय।…

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  • जो जीवन को दिशा देती है– “श्रीमद्भगवद् गीता”

    “जीवित अवस्था में गीता का अनुशीलन ही जीवन सफलता का आधार” मानव जीवन अनंत रहस्यों से परिपूर्ण है। उन रहस्यों…

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  • साहित्य

    जिसे लिखते, जिसे पढ़ते,ज्ञान जिससे अर्जित करते,देश, काल और परिस्थिति काचित्र मन में अंकित करते।। समाज का दर्पण कहलाता,समाज के…

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  • नवगीत दो पल

    पल दो पल बस साथ चलो, दो पल ही सही, मैं खुश हो लूँ। किस्मत ने राह अलग कर दी,…

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  • समाधि पाद सूत्र– २९

    ततः प्रत्येक्चेतनाधिगमोऽप्यन्तराया भावश्च । ततः= उक्त साधन से; अन्तरायाभाव= विघ्नों का अभाव; च= और; प्रत्यक्चेतनाधिगमः= अन्तरात्मा के स्वरूप का ज्ञान;…

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  • दो राहें

    एक राह थी — जिसको मंज़िल नहीं,दूजी राह — जिस पर तू नहीं।मैं वीरान जंगल में खड़ा हूँ,सोचता हूँ अब…

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  • कुसंग— स्वरचित कविता

    (१)धीरे-धीरे मन में घुलता, मुस्कान भरा ज़हर,झूठ लपेटे सत्य को, दिखे बड़ा ही सुन्दर।पहले लगता साथ मधुर, फिर बाँध ले…

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