Vijay Kumar
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साहित्य
तू कौन है, भोले?
नगर-नगर, डगर-डगर तू क्यों ऐसे फिरता है?बनके अजनबी, अपने ही घर में क्यों रहता है?तुझे कहूँ मुसाफ़िर या कोई घुसपैठिया,क्यों…
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साहित्य
स्नेह सुधा बरसाने वाली
मनका मंदिर है खाली,दिल का सिंहासन भी खाली !तरुणी कहाँ छुपी जा बैठी,स्नेह सुधा बरसाने वाली !! मन को तुम…
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साहित्य
सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है।
जीवन सीमित,आकांक्षाएं,इच्छाएं सीमाहीन।इस बीच जीवन जीना औरचाहना नित् नवीन।इच्छापूर्ति हेतु आपाधापी,उलझन का गरल पान,राग द्वेष,अशांति, हैमनुष्य सत्य से अनजान।कुछ अशांति…
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साहित्य
मोबाइल: जरूरत या अभिशाप?
(स्वरचित आलेख) आज के तकनीकी युग में मोबाइल फोन हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। यह एक…
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साहित्य
मनमौजी मौसम
ना तेज़ हवा, ना रुत जवाँ,ये वक़्त की अल्हड़पंती है। ना फूल खिला, ना बाग सजा,ये सावन की मटरगश्ती है।…
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साहित्य
क्या विना यज्ञ जनेऊ {उप’वीत} धारण किये हम ब्राह्मण हैं ?
।। क्या विना यज्ञ जनेऊ {उप’वीत} धारण किये हम ब्राह्मण हैं ? ?? ??? ।। सदोपवीतिना भाव्यं सदा बद्धशिखेन च…
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धर्म
लेख
।। ऋषियों की प्रेरणा से हमसभी आध्यात्मिक साधना से स्वयं ऊर्जावान हों, समाज को ऊर्जावान बनाएं कल्याण करें ।। जिस…
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साहित्य
मित्रता दिवस
आज मित्रता दिवस पर्व है,प्यारे बच्चों! आओ पास।जीवन में जो बहुत जरुरी,तुम्हें बताऊँ बेहद खास।। अभी से जानो, छोटे हो…
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साहित्य
मित्रता दिवस
मित्र - मौन की दास्तान, मित्रता - खामोशी का मुकाम। मित्र - प्रेम का नाम, मित्रता - जीवन के नाम।…
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साहित्य
भोजपुरी
दिनांक : 3 अगस्त , 2025दिवा : रविवारभोजपुरिया माटी बाटे सुगंधित ,सुगंधित बाटे इहवाॅं के हर फूल ।इहे माटी त…
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