Vijay Kumar
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साहित्य
मिट्टी
किसी ने कहाँ मिट्टी से मत खेल,मिट्टी लग जाएगी। मैंने हँसकर कहाँ,मिट्टी का पुतला,मिट्टी का बना इंसान हैं। मिट्टी से…
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साहित्य
वीर हनुमान हैं
अतुलित बलवान,सकल गुणों की खान।मात अंजना के पुत्र,वीर हनुमान हैं।राम नाम करें जाप,हरें जग के संताप।त्याग तपस्या की मूर्ति, करुणानिधान…
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साहित्य
प्रियतम घर आ
काले काले बादल आओ,झम-झम पानी बरसाओ।सूर्य ताप से मन व्याकुल है,और अधिक मत तरसाओ।आकर किधर लुप्त हो जाते ,धरती है…
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साहित्य
जिंदगी जीने की कला है
सच, जिंदगी जीने की बेशक कला हैसादगी और अनुशासन ही जीने की कला हैजीवन बड़ा अमूल्य है इसका सही प्रबंधन…
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साहित्य
जानकी अष्टकम।।
शुक्ल पक्ष के वैशाख महीने,नौमी तिथि जब थी तब आई,प्रकट भई थी,जनक दुलारी, पुष्य नक्षत्र मंगल दिन भाई ,छत्तीस के…
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साहित्य
केनोपनिषद्- द्वितीय खंड श्लोक ५
सम्बन्ध– अब उस ब्रह्म तत्वको इसी जन्म में जान लेना अत्यंत आवश्यक है, यह बतलाकर इस प्रकरण का उपसंहार किया…
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साहित्य
गुप्त नवरात्री की दसवीं महाविद्या माँ कमला
माँ कमला दस महा विद्याओं मेंसबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं,माँ कमला को शक्ति के प्रथम अवतार के रूप में आदिशक्ति…
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साहित्य
मैं चूहों की दौड़ में अब शामिल नहीं हूँ
सबकी प्रशंसा उदारता से करता हूँ,यह न केवल तारीफ प्राप्तकर्ता कीमनोदशा को प्रोत्साहित करता है,मेरी मनोदशा को भी ऊर्जा देता…
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साहित्य
“स्वामी की ज्योति”
स्वप्नों को जिसने दी उड़ान,जग को सिखाया आत्मसम्मान।धर्म, विज्ञान, विवेक का गान,थे वो भारत की सच्ची शान। शब्दों में जिनकी…
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साहित्य
रफ्ता रफ्ता
रफ्ता रफ्ता,ज़िंदगी को मुफ़्त मे खुरचता गया,मुलाज़मियत कैसी थी कि,सख्ती से कुचलता गया।। पता तक न चला,कि वक्त किधर गुजर…
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