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  • मां कुष्मांडा

           (आलेख) कूष्मांडा माता देवी दुर्गा के नौ रूपों में चौथे स्वरूप के रूप में पूजनीय हैं। उनका जन्म ब्रह्मा…

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  • प्यार के रंग

    मुझे आप कैसे भुलाये रहेंगी, सुरों में हमारे समाये रहेंगी। तराना सुरों में जो गाये रहेंगी, तुम्हे याद मेरी दिलाये…

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  • काश

    पता नहीं क्यों आजकलमैं सपने देखती हूं।सपनों में नई पीढ़ी कोदेश का भविष्य संवारते देखती हूं।तमाम असंभावनाओं, विषम परिस्थितियों सेलड़कर…

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  • नन्हा सूरज

    नन्हा सूरज एक दिन बोलाआज मुझे नहीं जाना हैसो रहे हैं धरती पर सब बच्चेआज मुझे भी सोना हैछुट्टियां चल…

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  • प्रीत के मीत

    प्रीत मेरी हे ऐसी श्याम से प्रियतम,देखों मेरी रीत ,ऐसा रंग में लायेंगी।हृदय वार दूं, में ये प्यार वार दूं,होह-होह…

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  • पर्यावरण और बिगड़ते हम

    विज्ञान की इस युग में मानव को कुछ वरदान मिले हैं वहीं कुछ अभिशाप भी मिले हैं।प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप…

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  • रंगमंच

    यह दुनिया एक रंग मंच है, एक सफर है।हम सबअपना अपना किरदार निभाने आते हैं।हर किरदार कीमंजिल अपनी अपनी है,राहें…

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  • दीपक तुम मेरे आंगन के

    काव्य घर में चहल पहल,हँसी का कारण,तुम बिना सूना लगता है घर आँगन। कभी खि‍लखि‍ला कर सवालों की बौछार करता,।…

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  • नशा विपरीत शान

    तेरे श्वसा में ही नशा है ,या नशा में ही श्वसा है ।नशा विपरीत ये शान है ,नशा रग रग…

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  • कूर्म उपप्राण

    पद 1कूर्म उपप्राण सिखाए हमें, दृष्टि को भीतर मोड़,इन्द्रियों को समेटकर, मन को शांति से जोड़।जैसे कछुआ अंग समेटे, स्थिर…

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