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  • मनपसंद कार्य न हो तो क्या क्रोध करना जायज है?

    (स्वरचित गद्य आलेख) 1. प्रस्तावनामनुष्य का जीवन इच्छाओं और कर्मों की जटिल डोर से बुना हुआ है। हर व्यक्ति चाहता…

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  • अकार

    (स्वरचित कविता) अक्षरों में प्रथम, स्वर का आधार,सृष्टि में गूँजा है, यह अकार अपार।शब्दों का बीज, ध्वनि का श्रृंगार,ज्ञान की…

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  • हरितालिका व्रत का महात्म्य

    भारतीय हिंदू महिलाएं अपने सुहाग की कामना के लिए हरितालिका तीज का व्रत रखती हैं। हर वर्ष हरितालिका तीज का…

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  • कहूं, या ना कहूं

    दिल की बातें, दिल में रह गई अरसा बीता।आज सोचती हूं, कहूं, या ना कहूं—संग तुम्हारे बीते पलों कोसहेज कर,छुपा…

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  • श्री जन कल्याणेश्वर मंदिर में श्री गायत्री महायज्ञ

    ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यम भर्गों देवस्य धीमहि धियो योन: प्रचोदयात। कल रविवार दिनांक 24 अगस्त 2025 को श्री जन कल्याणेश्वर…

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  • विरह

    (शिकायत राधा की)मैं साथ खड़ी थी तुम्हारेपर तुमने देखा ही नहींअपने भक्तों की भीड़ मेंमेरे पवित्र स्नेह कोतुमने पहचाना ही…

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  • समाधि पद

    सूत्र— ४वृत्तिसारूप्यमितरत्र ।इतरत्र= दूसरे समय में {द्रष्टा का} वृत्ति सारूप्यम्= वृत्ति के सदृश स्वरूप होता है । अनुवाद— दूसरे समय…

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  • हर पल बहता रहता जीवन

    ।।हर पल बहता रहता जीवन ।।शीतल मलयज सुरभित दिगंत,पवन संग उड़ता घन अनंत।गिरती बूंदें जा वन-उपवन,मंद स्वर में करती है…

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  • कोई और है

    उथल पुथल इतनी हो रही हैंकैसा चल रहा दौर है।मैं हूँ सामने बैठा मगरदिख रहा कोई और है।।महंगाई की इस…

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  • कविता- माता-पिता और गुरू

    माता ते जग है टिका, माता सम नहिं आन।दूजा गुरु सम नहिं कोई, जगत मातु-गुरु जान।। माता, गुरु, पितु तीन…

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